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सब्जी मेकर

डॉ.चंद्रेश कुमार छतलानी 
उदयपुर (राजस्थान) 
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इस दीपावली वह पहली बार अकेली खाना बना रही थी। सब्ज़ी बिगड़ जाने के डर से मध्यम आँच पर कड़ाही में रखे तेल की गर्माहट के साथ उसके हृदय की गति भी बढ़ रही थी। उसी समय मिक्सर-ग्राइंडर जैसी आवाज़ निकालते हुए मिनी स्कूटर पर सवार उसके छोटे भाई ने रसोई में आकर उसकी तंद्रा भंग की। वह उसे देखकर नाक-मुँह सिकोड़कर चिल्लाया,-“ममा…दीदी बना रही है… मैं नहीं खाऊंगा आज खाना!” सुनते ही वह खीज गयी और तीखे स्वर में बोली,-“चुप कर पोल्यूशन मेकर,शाम को पूरे घर में पटाखों का धुँआ करेगा…l” उसकी बात पूरी सुनने से पहले ही भाई स्कूटर दौड़ाता रसोई से बाहर चला गया और बाहर बैठी माँ का स्वर अंदर आया,-“दीदी को परेशान मत कर,पापा आने वाले हैं,आते ही उन्हें खाना खिलाना है।”,लेकिन तब तक वही हो गया था जिसका उसे डर थाl ध्यान बंटने से सब्ज़ी थोड़ी जल गयी थी। घबराहट के मारे उसके हाथ में पकड़ा हुई मिर्ची का डिब्बा भी सब्ज़ी में गिर गया। वह और घबरा गयी,उसकी आँखों से आँसू बहते हुए एक के ऊपर एक अतिक्रमण करने लगे और वह सिर पर हाथ रखकर बैठ गयी। उसी मुद्रा में कुछ देर बैठे रहने के बाद उसने देखा कि,खिड़की के बाहर खड़ा उसका भाई उसे देखकर मुँह बना रहा था। वह उठी और खिड़की बंद करने लगी,लेकिन उसके भाई ने एक पैकेट उसके सामने कर दिया। उसने चौंक कर पूछा,-क्या है ? भाई धीरे से बोला,-“पनीर की सब्ज़ी है,सामने के होटल से लाया हूँ।” उसने हैरानी से पूछा,-“क्यूँ लाया ?,रूपये कहाँ से आये ?” भाई ने उत्तर दिया,-“क्रैकर्स के रुपयों से…थोड़ा पोल्यूशन कम करूंगा… और क्यूँ लाया!” अंतिम तीन शब्दों पर जोर देते हुए वह हँसने लगा।

 परिचय-डॉ.चंद्रेश कुमार छतलानी का कार्यक्षेत्र उदयपुर (राजस्थान) स्थित विश्वविद्यालय में सहायक आचार्य (कम्प्यूटर विज्ञान)का है। इसी उदयपुर में आप बसे हुए हैं। इनकी लेखन विधा-लघुकथा,कहानी, कविता,ग़ज़ल,गीत,लेख एवं पत्र है। लघुकथा पर आधारित ‘पड़ाव और पड़ताल’ के खंड २६ में लेखक, अविराम साहित्यिकी,लघुकथा अनवरत (साझा लघुकथा संग्रह),लाल चुटकी(साझा लघुकथा संग्रह), नयी सदी की धमक(साझा लघुकथा संग्रह),अपने-अपने क्षितिज (साझा लघुकथा संग्रह)और हिंदी जगत(न्यूयॉर्क द्वारा प्रकाशित)आपके नाम हैं। ऐसे ही विविध पत्र-पत्रिकाओं सहित कईं ऑनलाइन अंतरतानों पर भी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं।