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सर्दी

बोधन राम निषाद ‘राज’ 
कबीरधाम (छत्तीसगढ़)
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सर्द भरा मौसम यहाँ,शीतल तन मन होय।
आग भरोसे दिन कटे,रात बिताये सोय॥

सभी काँपते हैं यहाँ,सभी तापते आग।
जलता हुआ अलाव है,मिल के गाते राग॥

शरद सुहानी है ऋतु,सुबह-शाम की धूप।
लगते सुन्दर आसमां,मौसम सौम्य स्वरूप॥

सर्दी बड़ी सुहावनी,मन को भाती शीत।
बैठ मजे लो उष्णता,गर्म चाय लो मीत॥

सर्दी का मौसम भला,होते सुर्ख जहान।
सभी लोग हैं काँपते,फिर भी खुश इंसान॥