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सुखद एहसास

ताराचन्द वर्मा ‘डाबला’
अलवर(राजस्थान)
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मैंने अपने मन को छुआ,
एक सुखद एहसास हुआ
क्या खोया क्या पाया,
दर्पण बिल्कुल साफ किया।

अंधेरों में किए उजाले,
दीनों के संग प्यार किया
नहीं की काँटों की परवाह,
हर आँगन गुलजार किया।

जीवन में जो आई मुसीबत,
उसका भी निस्तार किया
सीख लिया मिलकर रहना,
सबका आदर-सत्कार किया।

निज स्वार्थ को छोड़कर,
अपने देश से प्यार किया
मिट जाएंगे वतन की खातिर,
नहीं जीवन बेकार किया।

दीन-दुखियों की सेवा में,
सब-कुछ अपना लुटा दिया।
आँच नहीं अब आने दूंगा,
देश की खातिर प्रण किया॥

परिचय- ताराचंद वर्मा का निवास अलवर (राजस्थान) में है। साहित्यिक क्षेत्र में ‘डाबला’ उपनाम से प्रसिद्ध श्री वर्मा पेशे से शिक्षक हैं। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में कहानी,कविताएं एवं आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। आप सतत लेखन में सक्रिय हैं।

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