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सोच समय की

दुर्गेश कुमार मेघवाल ‘डी.कुमार ‘अजस्र’
बूंदी (राजस्थान)
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ऐ मन…,
सोच फिर ऐसी
क्यों सोचे,
जो संभावनाओं से परे है।
सोच कर ही जिसको,
न जाने क्यों…?
हर मन,
मन ही मन डरे है।
सुख के आँचल में,
दु:ख की प्रतिछाया का
ही सारा कारण है।
ऐसी सोच से,
तेरी बेचैनी भी तो
बिना कोई,
सही कारण है।
कुत्सित संभावनाओं
को हमेशा कुरेदना,
कहाँ अच्छा होता है ?
सुख के आँचल में
ही तो मुँह ढक कर,
बेचारा दु:ख
चैन से सोता है।
सुख तेरी आकांक्षाओं,
और आशाओं की
बैचनी से,दु:ख में,
बदल जाएगा।
यह तय है,
कि दु:ख जाग कर
तेरा सुख-चैन,
गर्त ही में डुबोएगा।
ठंडी हवाओं के
झोंकों में,दु:ख के,
बवंडर को अभी
आवाज ना दे।
तेरी अस्मिता की धरती
शांत है,निश्चल है,
ज्वालामुखी जगा कर
इसे अभी आग ना दे।
नदिया के दो किनारे,
साथ रहकर भी
कब और कहां,
मिल पाते हैं।
मिलकर जो किनारे,
अस्तित्व ही नदिया का
मिटा दे,ऐसे किनारे,
कहाँ किसको भाते हैं।
धरती और आकाश
क्षितिज पर,मिलकर भी
आभासी से मिलते हैं।
बसन्त में कितने ही
रंगों के,प्यारे-प्यारे
फूल खिलते हों,
पतझड़ में तो
पत्ते भी शाख से,
छिटककर दूर जा
गिरते हैं।
खो जाए
सुख और चैन,
दु:ख के आजमाने से
तो वापस कहाँ,
मिल पाते हैं ?
सुखों के मनमोहक,
आशियाने में
दुखों के काले साये,
किसको भाते हैं ?
थम जा,ठहर जा,
उड़ान का आसमान
तेरे लिए अभी,
छोटा है।
रुसवाईयां जहां हो,
तेरे लिए
जिस संसार में,
क्यों वहां
आजमाइश कर,
अपने ही आत्मसम्मान
को खोता है।
समझदार बनकर,
जब इस जमाने की
सोच और अधिक व्यापक
बन,आसमान छू जाएगी।
तो सोच तेरे साथ
सभी की,जन-जन के,
अरमानों को समझकर ,
आखिर तो सुधर जाएगी।
अग्नि यह भी,
किसी न किसी के
हृदय में कहीं तो जली है।
आखिर तो बुझ जाएगी॥

परिचय–आप लेखन क्षेत्र में डी.कुमार’अजस्र’ के नाम से पहचाने जाते हैं। दुर्गेश कुमार मेघवाल की जन्मतिथि-१७ मई १९७७ तथा जन्म स्थान-बूंदी (राजस्थान) है। आप राजस्थान के बूंदी शहर में इंद्रा कॉलोनी में बसे हुए हैं। हिन्दी में स्नातकोत्तर तक शिक्षा लेने के बाद शिक्षा को कार्यक्षेत्र बना रखा है। सामाजिक क्षेत्र में आप शिक्षक के रुप में जागरूकता फैलाते हैं। लेखन विधा-काव्य और आलेख है,और इसके ज़रिए ही सामाजिक मीडिया पर सक्रिय हैं।आपके लेखन का उद्देश्य-नागरी लिपि की सेवा,मन की सन्तुष्टि,यश प्राप्ति और हो सके तो अर्थ प्राप्ति भी है। २०१८ में श्री मेघवाल की रचना का प्रकाशन साझा काव्य संग्रह में हुआ है। आपकी लेखनी को बाबू बालमुकुंद गुप्त साहित्य सेवा सम्मान-२०१७ सहित अन्य से सम्मानित किया गया है|

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