कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’,
हैदराबाद (तेलंगाना)
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‘गीत-संगीत की अमिट पहचान’ (स्व. आशा भोसले विशेष)…
गूँजती है जब भी कोई मधुर तान,
याद आती है आशा की पहचान
महकते हैं सुर जैसे फूलों की तरह,
बसती है जिनमें संगीत की जान।
बहती हैं हवाएँ जब रागों में ढलकर,
छू जाती हैं दिल को हल्के से पलकर
सजती है हर धुन उनकी अदाओं से,
गाती है दुनिया उन्हें संभलकर।
झिलमिलाते हैं गीत चाँदनी बनकर,
बरसते हैं एहसास रिमझिम बनकर
सजता है हर लम्हा उनकी आवाज़ से,
महकता है जीवन सुर बनकर।
रुकती नहीं है ये संगीत की धारा,
चलता है हर दिल में उनका उजियारा
जीती हैं वो हर एक नगमे में,
बसता है उनमें सारा जहाँ हमारा।
झुकता है मन उस अमर स्वर के आगे,
मिटती नहीं जो समय के भी भागे।
नमन है उस अनुपम साधना को,
जो गूंजती है हर दिल के राग में॥
परिचय – कवि व अनुवादक कमलेकर नागेश्वर राव का साहित्यिक उपनाम ‘कमल’ है। आप सरकारी अध्यापक (हिंदी) ने रूप में जिला नागर कर्नूल के वेल्दंडा में कार्यरत हैं। तेलंगाना राज्य के रंगा रेड्डी जिले में निवासरत ‘कमल’ की तेलुगू और हिंदी के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में कविताएँ व विशेष आलेख प्रकाशित होते रहते हैं। इनको श्री श्री कला वेदिका राजमंड्री वालों से ‘साहिती मित्रा’ पुरस्कार, आदित्य संस्कृति (मप्र) से ‘हिंदी सेवी’ तथा डाॅ.सीता किशोर खरे स्मारक साहित्य पुरस्कार आदि मिले हैं।