ममता सिंह
धनबाद (झारखंड)
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तुमसे मिलने की खातिर, ईश्वर से प्रार्थना करते हैं,
जब सामने तुम आते हो, तुमसे ही हम पर्दा करते हैं।
जब भी दूर जाते हो, मिलने को हम तड़पा करते हैं,
तेरी नजरों में नहीं कीमत मेरी, बस हम रोया करते हैं।
मेरे लिए बस तुम ही तुम हो, इसे निभाया करते हैं,
ऐसा न हो वक्त रूठ जाए, बस हम आगाह करते हैं।
तुम्हीं हो मेरे श्याम, और तुम्हीं हो मेरे घनश्याम,
मेरी नज़रों में तुम नहीं आम, हम बतलाया करते हैं।
तुम्हीं हो मेरे दिन और रात, और तुम्हीं हो सूरज-तारे,
तुम्हें न हो इसका एहसास, हम समझाया करते हैं।
ये मेरे दिल की आवाज है, जिसे हम सुनाया करते हैं,
तुम्हीं दिल के पास हो, और तुमसे ही पर्दा करते हैं।
जाना हो कहीं तो कहीं, और ही चले जाया करते हैं,
मंजिल का हमें पता नहीं, बस हम दौड़ा करते हैं।
तुमसे है हमें लाखों शिकायत, होंठों पर गिनकर रखते हैं,
तुम्हारा दिल ना दुखे, और खुद से ही शिकायत करते हैं।
हमने तो दिल की सुना दी, अब तुम्हारा इंतजार करते हैं,
तुम चाहो तो समझो इसको, अब हम लिखना बंद करते हैं॥