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हम पढ़ेंगे

जबरा राम कंडारा
जालौर (राजस्थान)
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आगे बढ़ेंगे हम पढ़ेंगे,पढ़ने का जमाना है,
पढ़े-लिखे की कद्र बने है,ये मन में ठाना है।

शिक्षा से संभव सब-कुछ,अनपढ़ मन पछताता है,
पढ़ सके ना समझ सके,मन ही मन आकुलता है।

हिसाब-किताब की दिक्कत,वो समझ ना पाता है,
अंगुलियों पे लेखा-जोखा,आगे कुछ ना आता है।

पढ़े-लिखे बिन नहीं नौकरी,रोड़ा कदम-कदम है,
पढ़ा-लिखा पाता पद कुर्सी,शिक्षा में तो दम है।

पढ़ा-लिखा विद्वान बने है,अनपढ़ है नाकारा,
कुछ भी धंधा कर सकता है,शिक्षा सबल सहारा।

शिक्षा से स्तर सुधरे,शिक्षा ही साख जमाए,
शिक्षा से पहचान बढ़े,शिक्षा से ही चर्चाएं॥

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