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हर यौवन की कहानी होती है…

डॉ.अशोक
पटना(बिहार)
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यह एक संसार है,
बहुत बड़ा बाजार है
उछलकूद करते हैं यहां लोग,
परिश्रम से नहीं डरते हैं लोग
इतिहास मगर इसके पीछे रहता है कुछ यहां,
परिस्थितियों की कीमत चुकानी पड़ती है यहां
इसके पीछे छिपी यौवन की एक कहानी होती है,
आगे बढ़े हुए लोगों के यौवन की कहानी होती है।

यह दिक्कतों का संसार है,
बहुत दिखती भीड़-भाड़ है
मुश्किलें और मजबूरियाँ,
रहती सदैव यहां गुलजार है
मेहनतकश लोगों के लिए ही यहां,
सुख समृद्धि और शांति का संसार है
तमाम हालातों से लड़कर जीत की कहानी लिखी जाती है,
हर यौवन की एक सुंदर और आकर्षक कहानी होती है।

युद्ध और कर्म क्षेत्र में,
अपनों के बीच रेत में
कोई नहीं साथ देते हैं,
सब अपने-आपमें ही
मजबूती से फंसे होते हैं
मेहनती और ईमानदार ही यहां सदैव सफ़ल हो पाता है,
ज़िन्दगी में ज़िन्दगी से तरबतर होने का सुख पाता है
जीवन में जीत कर ही जीत की कहानी लिखी जाती है,
हर यौवन की उन्नत व आह्लादित वाली कहानी होती है।

मुसीबतों से छुटकारा मिल सकता है,
जब हौंसला बुलंद जिंदगी में रहता है
घर-घर में आज यही रहता आया एक दस्तूर है,
कोई यहां नहीं देखता कभी अपना कसूर है
मेहनतकश व ईमानदार शख़्श की कायनात में कहानी होती है,
हर यौवन की मिसाल देने वाली एक प्रेरणादायी कहानी होती है
हर परिस्थिति में कहां रहा किसी का साथ,
हर लोग बस करते दिखे अपनी अपनी बात
लोगों ने हर वक्त ज्यादती ही की है खूब यहां,
मुश्किल वक्त पर नहीं दिया किसी का साथ यहां
लड़कर जीत सकने वाले लोगों की हर पल कहानी बनती रही यहां,
हर यौवन के दौर में तरह-तरह के खेल की कहानी लिखी जाती है।

धूप-छाँव का तो यहां एक संसार है,
पैसे के लिए ही यहां खुले बाजार है
नफ़रत और घृणा का एक संस्कार है,
घमंड और अभिमान का व्यवहार है
वक्त पर बहाने बनाने वाले लोगों की बड़ी भीड़-भाड़ है,
हरपल हरक्षण बिना थके हुए यहां होता रहता दीदार है
लुच्चे-लफंगों की बड़ी-बड़ी खबरें यहां बनती रहती हैं यहां,
हर यौवन की बीते दिनों की कहानी खूब याद आती है यहां।

दोस्ती, विश्वास, श्रद्धा और विचार का कहां रहा मोल,
सब अपने-अपने तराजू पर तौलते रहे मान अनमोल
आँखों में नहीं रहीं शुचिता और अपनत्व का कभी भाव,
जिन्दगी सुनसान हुईं, नहीं दिखाई देता है यहां सद्भाव।
बहुत कष्ट झेलने पर प्रयास के परिणाम से बनी मेरी कहानी है,
हर यौवन में अतीत की तरह खूब याद आती अपनी कहानी है॥

परिचय–पटना(बिहार) में निवासरत डॉ.अशोक कुमार शर्मा कविता,लेख,लघुकथा व बाल कहानी लिखते हैं। आप डॉ.अशोक के नाम से रचना कर्म में सक्रिय हैं। शिक्षा एम.काम.,एम.ए.(राजनीति शास्त्र,अर्थशास्त्र, हिंदी,इतिहास,लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास) सहित एलएलबी,एलएलएम,सीएआईआईबी, एमबीए व पीएच-डी.(रांची) है। अपर आयुक्त (प्रशासन)पद से सेवानिवृत्त डॉ. शर्मा द्वारा लिखित अनेक लघुकथा और कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं,जिसमें-क्षितिज,गुलदस्ता, रजनीगंधा (लघुकथा संग्रह) आदि है। अमलतास,शेफालीका,गुलमोहर, चंद्रमलिका,नीलकमल एवं अपराजिता (लघुकथा संग्रह) आदि प्रकाशन में है। ऐसे ही ५ बाल कहानी (पक्षियों की एकता की शक्ति,चिंटू लोमड़ी की चालाकी एवं रियान कौवा की झूठी चाल आदि) प्रकाशित हो चुकी है। आपने सम्मान के रूप में अंतराष्ट्रीय हिंदी साहित्य मंच द्वारा काव्य क्षेत्र में तीसरा,लेखन क्षेत्र में प्रथम,पांचवां,आठवां स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर के अखबारों में आपकी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं।

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