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होली आई रे…

माया मालवेन्द्र बदेका
उज्जैन (मध्यप्रदेश)
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रंग और हम(होली स्पर्धा विशेष )…

आजा आजा रे साँवरिया,हम तो होली खेलेंगे।
होली खेलेंगे ओ कान्हा,तेरे संग फाग खेलेंगे॥

बरसाने की गुजरी,बन-ठन कर जब आयेगी,
ललिता सखी विशाखा,राधा के संग गायेगी।
फागुन की अबीर उड़ेगी,रंग चुनरिया भीगेगी,
यमुनाजी के तट पर कीच मचे जी,होली खेलेंगे।
आजा आजा रे साँवरिया,हम तो होली खेलेंगे,
होली खेलेंगे ओ कान्हा,तेरे संग फाग खेलेंगे…॥

गोकुल ढूंढें कित गयो मोहन,मुरली नाही बजाई,
भोर पड़े की निकली गोपियां,ढूंढत है अकुलाई।
माखन की मटकी ले खड़ी गुजरी,तुझसे खीजेगी,
धरा उड़े गुलाल अम्बर होवे लाल,संग होली खेलेंगे।
आजा आजा रे साँवरिया,हम तो होली खेलेंगे,
होली खेलेंगे ओ कान्हा,तेरे संग फाग खेलेंगे…॥

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