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हो हरियाली का संसार

डॉ.अशोक
पटना(बिहार)
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हो हरित वसुंधरा….

पर्यावरण सुरक्षित है तभी,
सुरक्षित है जब अपनी वसुंधरा।

जगत संसार में खूब उत्साह रहेगा,
जब जीवित रहेगी अपनी यह धरा।

जन-जन में हो रही अब यहां पुकार,
वसुंधरा में हो हरियाली का संसार।

पर्यावरण क्षरण एक अछूत व्यवहार,
जनमानस यहां कर रहे खूब चीत्कार।

पेड़-पौधे और हरियाली हैं यहां, अद्भुत हैं इनके श्रंगार,
जनमानस को हर पल हर क्षण, देते हैं खूब सारा प्यार।

नदिया, जलाशय, कुआं, सरोवर-पोखर और यहां के ताल-तलैया,
जन-जन तक पहुंचाएं खुशियाँ, जैसे ख़ुशी में हों जाएं हम सब भैया।

हम सबको अब पेड़-पौधे यहां, रखना होगा अब प्रावधान यहां,
जलवायु परिवर्तन पर हो रही समस्या का है यही समाधान यहां।

जल-जंगल और जीवन में हरियाली देगी सबको खुशहाली यहां,
पर्यावरण संरक्षण पर यह होगा मजबूत इरादों का प्रयास यहां।

ग्लोबल वार्मिंग से देश आज़ बहुत कष्टमय जीवन संग परेशान है,
पारिस्थितिकी तंत्र से हम सबको अब रहना खूब यहां सावधान है।

हरित वसुंधरा की आज़ बहुत ज़रूरत है देश में सर्वत्र यहां,
कल-कारखाने फैक्ट्रियां है इसकी मजबूत और अनुपयोगी कड़ियाँ यहां।

एक वृक्ष एक पुत्र का हमें सदैव रखना होगा एक सिद्धांत यहां,
जन-जन तक हमें अब पर्यावरण के लिए देना होगा ध्यान यहां॥

परिचय–पटना(बिहार) में निवासरत डॉ.अशोक कुमार शर्मा कविता,लेख,लघुकथा व बाल कहानी लिखते हैं। आप डॉ.अशोक के नाम से रचना कर्म में सक्रिय हैं। शिक्षा एम.काम.,एम.ए.(राजनीति शास्त्र,अर्थशास्त्र, हिंदी,इतिहास,लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास) सहित एलएलबी,एलएलएम,सीएआईआईबी, एमबीए व पीएच-डी.(रांची) है। अपर आयुक्त (प्रशासन)पद से सेवानिवृत्त डॉ. शर्मा द्वारा लिखित अनेक लघुकथा और कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं,जिसमें-क्षितिज,गुलदस्ता, रजनीगंधा (लघुकथा संग्रह) आदि है। अमलतास,शेफालीका,गुलमोहर, चंद्रमलिका,नीलकमल एवं अपराजिता (लघुकथा संग्रह) आदि प्रकाशन में है। ऐसे ही ५ बाल कहानी (पक्षियों की एकता की शक्ति,चिंटू लोमड़ी की चालाकी एवं रियान कौवा की झूठी चाल आदि) प्रकाशित हो चुकी है। आपने सम्मान के रूप में अंतराष्ट्रीय हिंदी साहित्य मंच द्वारा काव्य क्षेत्र में तीसरा,लेखन क्षेत्र में प्रथम,पांचवां,आठवां स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर के अखबारों में आपकी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं।

 

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