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अंतिम व्यक्ति के जीवन में बदलाव ही वास्तव में ‘भारत उदय’

‘नर्मदा साहित्य मंथन’- समापन…

इंदौर (मप्र)।

भारत शोध और बोध का देश रहा है और दोनों का आधार ही आध्यात्म रहा है। हमारे विचार का आधार भी आध्यात्म ही है। आज भारत का उदय हो रहा है। भारत के विकास में समाज के अंतिम व्यक्ति की सहभागिता और जीवन में बदलाव आना ही वास्तव में ‘भारत उदय’ है।
रविवार को इंदौर में यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अ.भा. सह प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी ने ‘मंथन से प्रबोधन’ विषय पर देवी अहिल्या विवि के मुख्य सभागृह में आयोजित ‘नर्मदा साहित्य मंथन’ के समापन सत्र में कही। तक्षशिला परिसर स्थित इस सभागार में पद्मश्री सुशील दोशी ने कहा कि मनुष्य ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति है और हमें देश को मजबूत करने के लिए काम करना चाहिए। जीवन में नैतिक मूल्यों की कमी आ रही है, जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। धनवान और लोकप्रिय व्यक्ति बनने की बजाए हमें अच्छे व्यक्ति बनने पर जोर देना चाहिए।
इस अवसर पर पद्मश्री नारायण व्यास, विश्व संवाद केंद्र (मालवा प्रान्त) के अध्यक्ष दिनेश गुप्ता, श्री पाणिनि संस्कृत विवि के कुलगुरु शिवशंकर मिश्र, साहित्य अकादमी मप्र के निदेशक डॉ. विकास दवे और संयोजक श्रीरंग पेंढारकर भी उपस्थित रहे।
सभी का आभार पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग (देवी अहिल्या विवि) की विभागाध्यक्ष डॉ. सोनाली नरगुंदे ने माना।
🔹इस्लामिक और लेफ्ट विचार भारत को कमजोर कर रहे
मंथन के प्रथम सत्र में ‘आंतरिक चुनौतियाँ और समाधान’ विषय पर प्रथम वक्ता जम्मू कश्मीर के पूर्व डीजीपी शेषपाल वेद ने कहा कि इस्लामिक और लेफ्ट विचार भारत को कमजोर कर रहे हैं। भारत की ताकत विश्व में बढ़ रही है, जिसके कारण कई देश भारत को गिराने में लगे हुए हैं। सीमा पर कई चुनौतियाँ है, लेकिन आंतरिक चुनौतियां भी कम नहीं है। भारत में भीतर तेजी से छोटे-छोटे पाकिस्तान बन रहे हैं, जो बेहद खतरनाक है। सीमा पर केंद्र सरकार बहुत ही अच्छा काम कर रही है। नैरेटिव युद्ध से सरकार भी निपट रही है, लेकिन अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है।
🔹ताकतों का गठबंधन खतरनाक
‘आंतरिक चुनौतियाँ और समाधान’ विषय पर ही केरल के पूर्व डीजीपी जैकब थॉमस ने कहा कि केरल में कम्यूनिस्ट और इस्लामिक ताकतों का गठबंधन खतरनाक है। श्री थॉमस ने भी नैरेटिव वार से सजग रहने की बात कही। केरल में कम्यूनिस्टों के साथ ही इस्लामिक विरोधी ताकतें भी सक्रिय है, जो भारत और हिंदूओं के विरोध में काम कर रही है। समय रहते ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
🔹धर्मांतरण सबसे बड़ी चुनौती
द्वितीय सत्र में ‘आमू आखा हिंदू छे’ विषय पर सामाजिक कार्यकर्ता सतीश गोकुल पांडा ने कहा कि धर्मांतरण जनजातिय समुदाय के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। जनजातिय समाज की अपनी सांस्कृतिक आधारशिला है, लेकिन उनकी पहचान पर प्रश्न चिह्न लगाए जा रहे हैं। पहले अंग्रेजों ने, फिर कम्युनिस्टों ने और ईसाईयों ने जनजातिय समुदाय का बड़े स्तर पर धर्मांतरण किया। आज भी समुदाय के सामने सबसे बड़ी चुनौती खुद के अस्तित्व को बचाना ही है। इसके लिए समुदाय को धर्मांतरण से बचना ही होगा।
🔹बेटियों को पढ़ाओ
तृतीय सत्र में ‘उदीयमान भारत में महिला नेतृत्व’ विषय पर वक्ता ले. कर्नल कमलप्रीत सग्गी ने कहा कि बेटियों को पढ़ाओ और कहो कि किसी ने डरें नहीं। आपने महिला सशक्तिकरण, नेतृत्व और शिक्षा नीति से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन विचार रखे। यह भी कहा कि महिला की विचार क्षमता, संसाधन प्रबंधन और लक्ष्य स्पष्ट हो तो नेतृत्व के आगे ‘महिला’ लगाने की आवश्यकता ही नहीं है। आज महिलाएं बहुआयामी हो रही है। पहले जहां महिलाओं के लिए अवसरों के दरवाजे बंद रहते थे, वहीं आज नीतियों ने समान अवसर उपलब्ध कराए हैं।
🔹हिंदू समाज को तोड़ने का प्रयास

चतुर्थ सत्र में ‘ब्रेकिंग इंडियाः स्वीकार नहीं’ विषय पर वक्ता बजरंगलाल बांगड़ा (विश्व हिंदू परिषद) ने बताया कि भारत को कमजोर करने के लिए हिंदू समाज को तोड़ने का प्रयास जारी है। भारत को मजबूत स्थिति में देखना कई वैश्विक विचारधाराओं को पसंद नहीं आ रहा है। हमें यह ध्यान रखना होगा कि जब तक हिंदू एक है, भारत को तोड़ा नहीं जा सकता है। हमें खुद को जोड़कर रखने के लिए काम करना चाहिए।