डॉ. श्राबनी चक्रवर्ती
बिलासपुर (छतीसगढ़)
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माना कि उम्र का फासला है बहुत,
दिलों की नजदीकियाँ लेकिन अभी कमसिन है।
दिनभर की मशीनी भाग-दौड़ में,
कुछ पल तेरे साथ सुकून के यक़ीनन तो है।
बेखबर है कि कब तक एक-दूजे का साथ दे पाएंगे,
कुछ रिश्तों के नाम नहीं होते, बस तरन्नुम-सा है।
दुनिया की खंजर निगाहों से बचना मुमकिन है क्या,
मेरे सामने ढाल बनकर खड़े होना इम्तिहान से कम नहीं।
लोग कहते हैं, हमेशा कहते रहेंगे,
किसी को शिद्दत से चाहना कोई गुनाह तो नहीं॥