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केकी कृष्ण की कविताओं में संघर्ष से जूझने और सीखने की प्रेरणा

पटना (बिहार)।

समकालीन कविता आज के समय, समाज और मनुष्य की वास्तविकताओं का सजीव दस्तावेज है। कवि केकी कृष्ण ने अपनी कविताओं से सामाजिक नफरत से परहेज और सहयोग की भावना को जीवनोपयोगी बताया है। उन्होंने जीवन के सुख-दुःख को स्वाभाविक मानते हुए उनसे संघर्ष करने और उनसे सीखने की प्रेरणा दी है।
साहित्यिक संस्था भारतीय युवा साहित्यकार परिषद के तत्वावधान में हुए कवि सम्मेलन में संयोजक सिद्धेश्वर ने यह विचार व्यक्त किए। वर्ष के इस अंतिम कवि सम्मेलन की अध्यक्षता केकी कृष्ण ने की। मुख्य अतिथि लखनऊ की लेखिका मंजू सक्सेना रहीं।
अध्यक्षीय वक्तव्य में केकी कृष्ण ने अपने कुछ उत्कृष्ट गीतों का पाठ किया और कहा कि चाहे पत्रिका हो या सोशल मीडिया, साहित्य के लिए समय देना ही श्रेष्ठ रचनाओं के सृजन का आधार है। आज अनेक रचनाकार प्रकाशित तो होना चाहते हैं, किंतु पढ़ने और सुनने में रुचि नहीं लेते। यह आज के साहित्य और रचनाकारों दोनों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।
आजन में देशभर से १२ से अधिक कवियों ने सशक्त रचनाओं का पाठ किया। इसमें मंजू सक्सेना, राजप्रिया रानी, पुष्पा पांडेय, गोविंद कुमार मिश्र ‘प्रभाकर’ व संतोष मालवीय आदि शामिल रहे।
इसी क्रम में अवसर कविता सप्ताह के अंतर्गत भी अनेक रचनाकारों ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं।
प्रभारी इंदु उपाध्याय ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।