ममता सिंह
धनबाद (झारखंड)
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‘स्वागत, संकल्प, संघर्ष और सफलता’ (नववर्ष २०२६ विशेष)…
कैसा है ये हर्ष, आया है नववर्ष,
देखो चेहरे पर छाया है अति हर्ष।
बूढ़े, बच्चे खुशियों से है झूम रहे,
नववर्ष का स्वागत देखो कर रहे।
स्वागत है, स्वागत है यह नववर्ष,
संदेशा देता है होता बड़ा उत्कर्ष।
हर रात के बाद होता है जब दिन,
यह किस्सा सिखाता बस संघर्ष।
इस वर्ष नया कुछ कर जाना है,
ऐसा ही कुछ नया लेना है संकल्प।
परिश्रम के बाद ही है सफलता,
जब ईमानदारी से करते हम कर्म।
अपना फर्ज निभाने में है कैसी शर्म,
जो खोजा वो ही पाया, जानो सब मर्म।
नया वर्ष कुछ नयी उम्मीदें लाया है,
थोड़ा संघर्ष और बढ़ा दो परिश्रम
चेहरे पर खुशियाँ और आशा लाया है,
सब मिलकर होते हैं अब बहु हर्ष।
ऐसा है ये वर्ष, जब आता है नववर्ष,
सभी तीर्थ स्थलों पर जाते हैं प्रतिवर्ष॥