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ठंड का अनुभव

ममता सिंह
धनबाद (झारखंड)
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ठंड का अनुभव मिला-जुला अनुभव,
बहुत ही मुश्किल है इसका प्रभाव।

हाथ-पैरों में कंपकंपी दिल चाहे गरमी,
काम तो काम है, चाहे हो कितनी सर्दी।

वक़्त पर कार्यालय, वक़्त पर विद्यालय,
वक्त पर आवासीय, वक्त पर पुस्तकालय।

कार्य न रूके, आस न टूटे, साथ न छूटे,
सबका साथ जब मिले, आस संग न छूटे।

चाय के साथ बिस्किट पकौड़ी का स्वाद,
जब मिलें अपने सब अलाव के पास।

बातें हो सामाजिक और राजनीतिक,
चर्चा हो फिल्मी गीत और धारावाहिक।

मैथी का लड्डू, तिल बादाम की बरफी,
जब खायें बूढ़े, बच्चे ना लगे सर्दी।

गरीबों के पास नहीं है कोई रजाई- कम्बल,
ना ही देता है गरीबों को कोई सम्बल।

उसका रखवाला होता है धूप और अलाव,
सड़कों और खेतों में करता वह नित काम।

दाँत किटकिटाना, हाथ-पांव में ठिठुरन,
उनका छोटा-सा गमछा बचाए सर्दी।

कहावत है ‘जितना कपड़ा, उतना ठंडा।
और कम है कपड़ा, कुछ कम है ठंडा॥