सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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प्रखर सूरज नहीं उगता
निकलता देर से बाहर,
अँधेरा हो रहा जल्दी
ठंड अब झूमकर आई।
घूमने का मजा दिन भर
उठाते लोग जाड़े में,
चलो सब घूम कर आएँ
ठंड अब झूमकर आई।
पुष्प हर रंग के प्यारे
खिले हैं आज बगिया में,
धूम अब सब्ज़ियों की है
ठंड अब झूमकर आई।
स्वाद की बात जाड़े में
बनाओ हलवा गाजर का,
साग सरसों संग रोटी
ठंड अब झूमकर आई।
बनाया योग्य मालिक ने,
न कोई ठंड से काँपे।
बाँटिए प्यार से कम्बल,
ठंड अब झूमकर आई॥