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पितृ ऋण

दीप्ति खरे
मंडला (मध्यप्रदेश)
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श्राद्ध, श्रद्धा और हम (पितृ पक्ष विशेष)…

पितृ पक्ष की बेला,
संस्कारों की परछाई है
आह्वान करते उन पूर्वजों का,
मन में श्रद्धा की गहराई है।

श्रद्धा सुमन अर्पित उन्हें,
जिनकी वाणी में था आशीष
नमन उन पूर्वजों का जो,
जिनकी तृप्ति शुभ फलदाई है।

जो थे कभी साथ हमारे,
देव रूप में धरा पर आए हैं
जल, तिल, कुश से जल देते उनको,
भोजन की थाली उनके लिए सजाई है।

जिनका तर्पण हो गया गया जी में,
उन्हें बस नमन समर्पित है
जो पितृ करते प्रतीक्षा अब भी,
श्रद्धा से अन्न जल उन्हें समर्पित है।

श्राद्ध नहीं बस रस्म मात्र,
यह पूर्वजों के प्रति श्रद्धा है।
पितृ पक्ष में पूर्वजों का सम्मान,
बस पितृ ऋण की प्रतिपूर्ति है॥