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प्रकृति का पुजारी है वसंत उत्सव

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ 
मनावर (मध्यप्रदेश)
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ज़िंदगी एक वसंत… (वसंत पंचमी विशेष)…

‘वसंत पंचमी’ जो अबूझ मुहूर्त माना जाता है, विवाह आदि मांगलिक कार्य तथा नवीन प्रतिष्ठान के लिए श्रेष्ठ दिन होता है। ऋतुराज वसंत के आने पर वृक्षों की पत्तियाँ अभिवादन के लिए जमीन पर बिछ जाती हैं। टेसू के फूल खिलने लगते हैं। आमों के वृक्ष पर आए मोर (फूल) ऐसे लगते हैं, मानों सेहरा बांध रखा हो एवं नव कोपलें स्वागत गीत गा रही हों।
ज़िंदगी के वसंत में ऋतुराज वसंत गुलाबी ठंड से प्रकृति में नया रस घोलता है। वृक्ष वसंत के सूचक और हमारे जीवन में उपयोगी, पूजनीय रहे हैं। सूखे पहाड़ों पर बिना पत्ती के वृक्ष अपनी वेदना किसे बताएं ? बारिश होगी, तभी इन वृक्षों पर हरियाली अपना डेरा जमा सकेगी। बस इन्हें इन्सान काटे ना, क्योंकि होली के समय चोरी से ऐसे वृक्षों को बेजान समझकर अनुमति के बिना काटने की फ़िराक में लोग रहते हैं। वृक्षों से ही जंगल, पहाड़ का सौंदर्य है। वृक्ष ही इन्सान का मददगार एवं अंतिम पड़ाव तक का साथी होता है, व पशु-पक्षियों को आसरा होता है।

वसंत पंचमी के दिन से प्रकृति सुंदर टेसू का आवरण ओढ़ कर वसंत उत्सव में एक नई ऊर्जा प्रदान करती है। आओ, सब मिलकर वसंत उत्सव मनाएं।

परिचय-संजय वर्मा का साहित्यिक नाम ‘दॄष्टि’ है। २ मई १९६२ को उज्जैन में जन्मे श्री वर्मा का स्थाई बसेरा मनावर जिला-धार (म.प्र.) है। भाषा ज्ञान हिंदी और अंग्रेजी का रखते हैं। आपकी शिक्षा हायर सेकंडरी और आयटीआय है। कार्यक्षेत्र-नौकरी ( मानचित्रकार के पद पर सरकारी सेवा) है। सामाजिक गतिविधि के तहत समाज की गतिविधियों में सक्रिय हैं। लेखन विधा-गीत, दोहा, हायकु, लघुकथा, कहानी, उपन्यास, पिरामिड, कविता, अतुकांत, लेख, पत्र लेखन आदि है। काव्य संग्रह-दरवाजे पर दस्तक, साँझा उपन्यास-खट्टे-मीठे रिश्ते (कनाडा), साझा कहानी संग्रह-सुनो, तुम झूठ तो नहीं बोल रहे हो और लगभग २०० साँझा काव्य संग्रह में आपकी रचनाएँ हैं। कई पत्र-पत्रिकाओं में भी निरंतर ३८ साल से रचनाएँ छप रहीं हैं। प्राप्त सम्मान-पुरस्कार में देश-प्रदेश-विदेश (कनाडा) की विभिन्न संस्थाओं से करीब ५० सम्मान मिले हैं। ब्लॉग पर भी लिखने वाले संजय वर्मा की विशेष उपलब्धि-राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय स्तर पर मिले सम्मान हैं। इनकी लेखनी का उद्देश्य-मातृभाषा हिन्दी के संग साहित्य को बढ़ावा देना है। आपके पसंदीदा हिन्दी लेखक-मुंशी प्रेमचंद,तो प्रेरणा पुंज-कबीर दास हैं। विशेषज्ञता-पत्र लेखन में है। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-देश में हिंदी को पूर्ण बढ़ावा मिले, बेरोजगारी की समस्या दूर हो, महंगाई भी कम हो, महिलाओं पर बलात्कार, उत्पीड़न, शोषण आदि पर अंकुश लगे और महिलाओं का सम्मान हो।