प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला(मध्यप्रदेश)
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‘स्वागत, संकल्प, संघर्ष और सफलता’ (नववर्ष २०२६ विशेष)…
कर स्वागत नव साल का, फिर कर नव संघर्ष।
तभी सफलता हाथ में, अधरों पर नव हर्ष॥
जो जूझें व्यवधान से, कभी न पाते हार।
संकल्पित मानव गहें, जीवन में उजियार॥
भूलो सारी वेदना, कर लो मन मजबूत।
काल बनेगा आज तो, मंज़िल हित का दूत॥
नये साल के पल नवल, खुशहाली है आज।
मंगलमय यह दौर है, चहके ख़ूब समाज॥
नई चल रही है हवा, खुशबू के नव रंग।
आज निराशा से करे, नव आशा तो जंग॥
सूरज की तैयारियाँ, नया लिया संकल्प।
देखो अब अवसाद का, काल बहुत ही अल्प॥
नग़मे अधरों पर नये, नया बज रहा साज़।
हैं उमंग में आज सब, खुशियांँ हैं सरताज॥
नई चेतना दे रही, जग को नव आनंद।
मस्ती में अब झूमता, नर-नारी का वृंद॥
मायूसी रोने लगी, उल्लासित मुस्कान।
नया आज परिवेश है, मिला समय को मान॥
आज नया संघर्ष है, आज नवल है जोश।
उम्मीदों के दौर में, लक्ष्य आज आगोश॥
अर्जुन ने ली है शपथ, धारित नया कमान।
नया तीर है शक्तिमय, होगा नव संधान॥
धूप सुनहरी है निकट, सिद्ध आज दिनमान।
सकल विश्व की गति नवल, हर कोई बलवान॥
नये साल का आवरण, नव होने की बात।
समय बा़ँटता बेहिचक, जन-जन को सौगात॥
परिचय–प्रो.(डॉ.)शरद नारायण खरे का वर्तमान बसेरा मंडला(मप्र) में है,जबकि स्थायी निवास ज़िला-अशोक नगर में हैL आपका जन्म १९६१ में २५ सितम्बर को ग्राम प्राणपुर(चन्देरी,ज़िला-अशोक नगर, मप्र)में हुआ हैL एम.ए.(इतिहास,प्रावीण्यताधारी), एल-एल.बी सहित पी-एच.डी.(इतिहास)तक शिक्षित डॉ. खरे शासकीय सेवा (प्राध्यापक व विभागाध्यक्ष)में हैंL करीब चार दशकों में देश के पांच सौ से अधिक प्रकाशनों व विशेषांकों में दस हज़ार से अधिक रचनाएं प्रकाशित हुई हैंL गद्य-पद्य में कुल १७ कृतियां आपके खाते में हैंL साहित्यिक गतिविधि देखें तो आपकी रचनाओं का रेडियो(३८ बार), भोपाल दूरदर्शन (६ बार)सहित कई टी.वी. चैनल से प्रसारण हुआ है। ९ कृतियों व ८ पत्रिकाओं(विशेषांकों)का सम्पादन कर चुके डॉ. खरे सुपरिचित मंचीय हास्य-व्यंग्य कवि तथा संयोजक,संचालक के साथ ही शोध निदेशक,विषय विशेषज्ञ और कई महाविद्यालयों में अध्ययन मंडल के सदस्य रहे हैं। आप एम.ए. की पुस्तकों के लेखक के साथ ही १२५ से अधिक कृतियों में प्राक्कथन -भूमिका का लेखन तथा २५० से अधिक कृतियों की समीक्षा का लेखन कर चुके हैंL राष्ट्रीय शोध संगोष्ठियों में १५० से अधिक शोध पत्रों की प्रस्तुति एवं सम्मेलनों-समारोहों में ३०० से ज्यादा व्याख्यान आदि भी आपके नाम है। सम्मान-अलंकरण-प्रशस्ति पत्र के निमित्त लगभग सभी राज्यों में ६०० से अधिक सारस्वत सम्मान-अवार्ड-अभिनंदन आपकी उपलब्धि है,जिसमें प्रमुख म.प्र. साहित्य अकादमी का अखिल भारतीय माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार(निबंध-५१० ००)है।