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बीत गया एक और वसंत

सरोज प्रजापति ‘सरोज’
मंडी (हिमाचल प्रदेश)
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स्वागत, संकल्प, संघर्ष और सफलता (नववर्ष २०२६) विशेष…

बीत गया एक और वसंत,
सामने है एक और नया वसंत
कल तक था जो नया-नया,
हुआ पुराना, जब चलते गया।
बीत गया एक और वसंत…

कितने ही वर्ष बीत गए,
बचपन-जवानी संग उम्र ले गए
मुड़कर देखा, मुट्ठी से रेत ज्यों फिसल गई
उम्र संग-संग जठर, जीवन भी गया।
बीत गया एक और वसंत…

ईश्वर की अनुकम्पा रही,
संजोए अरमान, देव रहमत रही
अपना आशियाना अब बना रही,
लख-लख धन्य हे कृष्ण! मुराद पूर्ण की।
बीत गया एक और वसंत…

बीता वर्ष कुछ सरका यूँ,
दुःख, दर्द, बिछोह… प्रकृति प्रहार कहीं दे गया
संभलते, गिरते-उठते… सबक ले चले,
वर्ष संग-संग सब सह गए।
बीत गया एक और वसंत…

उम्मीद,उल्लास ले दृढ़ मन बढ़ चला,
शनै-शनै नया वर्ष दस्तक दे चला
करके संकल्प श्रेष्ठ गुणधर्म,
ठान लिया, मन वचन सद्कर्म।
बीत गया एक और वसंत…

नव वर्ष, करके स्वागत आनंद,
मंगल गीत, बधाइयां सानंद
नया वसंत, हे! सच्चिदानंद,
दें आशीष, हरि भक्ति आनंद।
बीत गया एक और वसंत…

आया है अब नया वर्ष,
हो सब ओर खुशहाली आकर्ष
सुखद, सौभाग्य प्राणी मात्र,
सबका मालिक ‘विधाता’ मात्र।
बीत गया एक और वसंत…

सुख-समृद्धि देना भगवन्,
दुःख-क्लेश हरना भगवन्।
सारा आलम, हम तेरे भगवन्,
अपनी दया, वर देना भगवन्
बीत गया एक और वसंत॥

परिचय-सरोज कुमारी लेखन संसार में सरोज प्रजापति ‘सरोज’ नाम से जानी जाती हैं। २० सितम्बर (१९८०) को हिमाचल प्रदेश में जन्मीं और वर्तमान में स्थाई निवास जिला मण्डी (हिमाचल प्रदेश) है। इनको हिन्दी भाषा का ज्ञान है। लेखन विधा-पद्य-गद्य है। परास्नातक तक शिक्षित व नौकरी करती हैं। ‘सरोज’ के पसंदीदा हिन्दी लेखक- मैथिली शरण गुप्त, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ और महादेवी वर्मा हैं। जीवन लक्ष्य-लेखन ही है।