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मजदूरों की पीड़ा उकेर कर डॉ. दीप्ति खरे बनीं प्रथम विजेता

इंदौर (मप्र)।

हिंदीभाषा डॉट कॉम परिवार द्वारा मातृभाषा हिंदी के प्रचार निमित्त मई माह में १०७ वीं स्पर्धा आयोजित की गई। ‘मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ?’ विषय पर आयोजित इस प्रतियोगिता में डॉ. दीप्ति खरे ने प्रथम विजेता (पदय) बनने का सम्मान पाया है।
यह जानकारी मंच-परिवार की सह-सम्पादक श्रीमती अर्चना जैन और संस्थापक-सम्पादक अजय जैन ‘विकल्प’ ने दी। आपने बताया कि, १ राष्ट्रीय कीर्तिमान, १.७० करोड़ दर्शकों-पाठकों का अपार स्नेह एवं १० सम्मान पाने वाले इस मंच द्वारा आयोजित उक्त स्पर्धा में श्रेष्ठता अनुरुप निर्णायक मंडल ने पद्य वर्ग में मजदूरों की पीड़ा उकेरने वाली रचना ‘मजदूर…’ पर डॉ. खरे (मंडला, मप्र) को प्रथम चुना है।
मंच की संयोजक प्रो.डॉ. सोनाली सिंह, मार्गदर्शक डॉ. एम.एल. गुप्ता ‘आदित्य’ ने इन सहित सभी विजेताओं व सहभागियों को हार्दिक बधाई दी है।
आपने बताया कि पद्य वर्ग में ही ‘सम्मान के अधिकारी हैं’ कविता के लिए श्रीमती राधा गोयल (दिल्ली) को दूसरा स्थान मिला है, जबकि ‘बिना श्रमिक नहीं विकास’ कविता पर सरोज प्रजापति ‘सरोज’ (मंडी, हिमाचल प्रदेश) तीसरे स्थान पर हैं। गद्य वर्ग निरंक रहा है।