प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला(मध्यप्रदेश)
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गाँव का रहने वाला हूँ। गाँव में उस समय लोगों में बहुत प्रेम-भाव व सद्भाव था। छोटे, बड़ों का बहुत सम्मान करते थे। होली पर हुल्लड़ नहीं होती थी। बच्चे-जवान, बूढ़े सभी मर्यादा में रहते थे, और एक-दूसरे का सम्मान करते थे।
हम बच्चे सालभर होली का इंतज़ार करते थे। मैं अपने चाचा के साथ रंग-गुलाल, पिचकारी लेने बड़े उत्साह के साथ पास के कस्बे जाता था। होली के दिन पुराने कपड़े पहनता था। होली के दिन सबसे पहले हम रंग-गुलाल भगवान जी को चढ़ाते थे, फिर घर के बड़ों को गुलाल लगाकर उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेते थे। फिर दोस्तों से खेलने मुहल्ले चला जाता था।
गाँव भर के लोग हमारे माता-पिता (अम्मा-दादा)को गुलाल लगाने आते थे। बाग गाने वाले आते थे। मैं हमउम्र दोस्तों के साथ खूब मस्ती करता था,पर हम लोग न तो कभी अभद्रता करते थे, और न ही अशोभनीय हरकतें करते थे, पर आनंद पूरा लेते थे। रंग खत्म हो जाए तो पानी से भी होली खेलते थे।
हम पूरे पाँच दिन मस्ती करते थे। तो ऐसा था हमारा बचपन और हमारे बचपन की होली, जो संस्कारों, शालीनता व समझ से भरी हुई थी।
परिचय–प्रो.(डॉ.)शरद नारायण खरे का वर्तमान बसेरा मंडला(मप्र) में है,जबकि स्थायी निवास ज़िला-अशोक नगर में हैL आपका जन्म १९६१ में २५ सितम्बर को ग्राम प्राणपुर(चन्देरी,ज़िला-अशोक नगर, मप्र)में हुआ हैL एम.ए.(इतिहास,प्रावीण्यताधारी), एल-एल.बी सहित पी-एच.डी.(इतिहास)तक शिक्षित डॉ. खरे शासकीय सेवा (प्राध्यापक व विभागाध्यक्ष)में हैंL करीब चार दशकों में देश के पांच सौ से अधिक प्रकाशनों व विशेषांकों में दस हज़ार से अधिक रचनाएं प्रकाशित हुई हैंL गद्य-पद्य में कुल १७ कृतियां आपके खाते में हैंL साहित्यिक गतिविधि देखें तो आपकी रचनाओं का रेडियो(३८ बार), भोपाल दूरदर्शन (६ बार)सहित कई टी.वी. चैनल से प्रसारण हुआ है। ९ कृतियों व ८ पत्रिकाओं(विशेषांकों)का सम्पादन कर चुके डॉ. खरे सुपरिचित मंचीय हास्य-व्यंग्य कवि तथा संयोजक,संचालक के साथ ही शोध निदेशक,विषय विशेषज्ञ और कई महाविद्यालयों में अध्ययन मंडल के सदस्य रहे हैं। आप एम.ए. की पुस्तकों के लेखक के साथ ही १२५ से अधिक कृतियों में प्राक्कथन -भूमिका का लेखन तथा २५० से अधिक कृतियों की समीक्षा का लेखन कर चुके हैंL राष्ट्रीय शोध संगोष्ठियों में १५० से अधिक शोध पत्रों की प्रस्तुति एवं सम्मेलनों-समारोहों में ३०० से ज्यादा व्याख्यान आदि भी आपके नाम है। सम्मान-अलंकरण-प्रशस्ति पत्र के निमित्त लगभग सभी राज्यों में ६०० से अधिक सारस्वत सम्मान-अवार्ड-अभिनंदन आपकी उपलब्धि है,जिसमें प्रमुख म.प्र. साहित्य अकादमी का अखिल भारतीय माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार(निबंध-५१० ००)है।