मेरा बचपन और होली

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* गाँव का रहने वाला हूँ। गाँव में उस समय लोगों में बहुत प्रेम-भाव व सद्भाव था। छोटे, बड़ों का बहुत सम्मान करते थे। होली पर हुल्लड़ नहीं होती थी। बच्चे-जवान, बूढ़े सभी मर्यादा में रहते थे, और एक-दूसरे का सम्मान करते थे।हम बच्चे सालभर होली का इंतज़ार करते थे। मैं अपने … Read more

दु:ख बस मन का भाव

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************************* भागा सुख को थामने,दिया न सुख ने साथ।कुछ भी तो पाया नहीं,रिक्त रहा बस हाथ॥रिक्त रहा बस हाथ,काल ने नित भरमाया।सुख-लिप्सा में खोय,मनुज ने कुछ नहिं पाया॥जब अंतिम संदेश,तभी निद्रा से जागा।देखो अब है अंत,आज मैं सब तज भागा॥ दु:ख बस मन का भाव है,भाव करे बेचैन।वरना सुख-दु:ख एक से,संतों … Read more

राखी में बसा पूरा मज़हब

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) *********************************************************************** रक्षाबंधन पर्व विशेष……….. राखी ने फिर से दिया,इक नेहिल पैग़ाम।बहना का ख़त बांचता,सावन यह अभिराम॥ धागा दिन पर दिन हुआ,और-और मजबूत।भाई का तो कर हुआ,संरक्षा का दूत॥ रोली बनकर के दुआ,गर्वित करती माथ।हर युग,हर पल,हर जनम,भाव निभाते साथ॥ गाता रक्षापर्व नित,शुभ-मंगल के गीत।हो चाहे परदेश में,राखी जाती जीत॥ बिन चिट्ठी,बिन … Read more