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मेरे प्रियतम

नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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मेरे सपनों में जो आते, वही हैं मेरे प्रियतम,
हूँ मैं एकमात्र उनकी, वह मेरा यह अधिकार सदा, अब परस्पर ही प्रियतम।

वे मिलें या न मिलें, इसकी चिंता नहीं है अब मेरे प्रियतम,
प्राणों का सौदा हो गया अब क्षण में, कुछ ऐसे ही मेरे प्रियतम।

अब मैं जीती हूँ सिर्फ उनके लिए, मेरे प्रियतम,
वो प्रेम करें या न करें, अब मुझे नहीं फ़िक्र मेरे प्रियतम।

जब भी लगती है उनकी लगन, मैं दुनिया से कट गई हूँ मेरे प्रियतम,
क्या मेरा, क्या तेरा, इससे दूर चली गई हूँ अब मेरे प्रियतम।

संसार के लिए अब नहीं जीते, जीते हैं बस तेरे लिए मेरे प्रियतम,
माता, पिता, भाई, बहन, पति, बेटे सबसे बेख़बर अब मेरे प्रियतम।

तुम ही हो मेरे कुल परिवार, मेरे प्रियतम,
दुनिया माने या न माने, इससे कुछ फ़र्क नहीं पड़ता मेरे प्रियतम।

तू ही, तू ही है अब बस मेरे इस जीवन में मेरे प्रियतम,
मेरे सपनों में जो आते, वही हैं मेरे प्रियतम॥