सोनीपत (हरियाणा)।
प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार की २७० वीं साप्ताहिक आभासी काव्य गोष्ठी ‘शरद पूर्णिमा’ विषय पर आयोजित की गई। चंद्रमा की धवल आभा, भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा और भक्ति-सौंदर्य से प्रेरित रचनाओं ने इस साहित्यिक मंच को भावमय बना दिया।
संस्था की संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह के अनुसार कार्यक्रम का संचालन भास्कर सिंह ‘माणिक’ ने किया। अध्यक्षता नई दिल्ली से मणिका वर्मा ने की तथा दक्षिण अमेरिका से जुड़ी सांद्रा लुटावन गणेश मुख्य अतिथि रहीं। शुभारंभ विजय रघुनाथराव डांगे द्वारा प्रस्तुत संगीतमय गुरु वंदना, गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना से हुआ। गोष्ठी में पंडित अवधेश प्रसाद मिश्र ‘मधुप’, डॉ. शेषपाल सिंह ‘शेष’, शोभा प्रसाद, दुर्गा दत्त मिश्र ‘बाबा’, राकेश माहेश्वरी ‘काल्पनिक’, रामापति मौर्य, ज्योति प्यासी ‘अनिका’, दिनेश दुबे, श्री डांगे, ‘माणिक’, संस्थापक श्रीमती राधाश्री शर्मा एवं पवनेश मिश्र सहित देश-विदेश के सृजनकारों ने शरद पूर्णिमा की आध्यात्मिक एवं काव्यात्मक महत्ता को अपनी रचनाओं में अभिव्यक्त किया।
उन्होंने बताया कि समापन अवसर पर राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ के स्मरणोत्सव वर्ष के उपलक्ष्य में राष्ट्रगीत का भावपूर्ण गायन किया गया।
राधाश्री शर्मा ने सबका आभार व्यक्त किया।