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शाकाहारी भोजन ही श्रेष्ठ

हरिहर सिंह चौहान
इन्दौर (मध्यप्रदेश )
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शाकाहारी भोजन हमारे शरीर की मूलभूत आवश्यकता है। स्वस्थ शरीर के लिए शाकाहारी भोजन अमृत के समान है। आज विश्व में बढ़ते अत्याचार, मार-काट, हिंसा की इस एक लहर-सी चल पड़ी है, वहीं मनुष्य में दया, प्रेम, मानवता के खत्म होने का मुख्य कारण मांसाहार और मदिरापान है। भारतीय संस्कृति के लिए मांसाहार शब्द कलंक रुपी है। मानव पशुओं की हत्या कर उनका मांस खाते हैं। वह पाप के भागीदार होते हैं, क्योंकि संसार के सभी जीव-जंतु पशु-पक्षियों में मानव ही श्रेष्ठ माना गया है । प्रसिद्ध वैज्ञानिक जार्ज बर्नार्ड शॉ कहते थे “हम हैं कत्ल किए गए जानवरों की ज़िन्दा कब्रें उन जानवरों की, जिन्हें हमने अपनी भूख मिटाने के लिए कत्ल कर मौत के घाट उतारा।”
यदि मनुष्य की तरह पशुओं को भी अधिकार होते कभी, तो ? मानव को पर्याप्त सोचने-समझने की शक्ति ईश्वर ने दी है, फिर भी आदमी पशु-पक्षियों की हत्या करता है। संसार के किसी धर्म में यह नहीं लिखा है, कि पशु-पक्षियों की निर्मम हत्या करें। पशु बलि की अपेक्षा धर्म और न्याय के कार्य करना प्रभु को अधिक पसंद है। इस्लाम धर्म के अनुसार संसार के सभी जीव-जंतु प्राणियों की रक्षा करो। अल्लाह गोश्त पसंद नहीं करता। अल्लाह ताला की कुर्बानी के लिए बलि के गोश्त और लहू से कोई वास्ता नहीं, केवल तुम्हारे विश्वास की जरूरत है। प्रभु ईसा मसीह ने कहा, कि मेरे भक्तों और शिष्यों तुम मांस भक्षण तथा जीव हत्या मत करना। मांस खा कर तुम अपने शरीर को चलता फिरता कब्रस्तान मत बनाओ। तुम हमेशा गरीब व बेसहारा लोगों की मदद करो।
हिंदू धर्म के अनुसार जो लोग शाकाहारी भोजन को छोड़कर मांसाहारी जीव, जंतु-पशुओं यानी मुर्दा का मांस सेवन करते हैं, वो पापी और राक्षस के समान होते हैं। उनमें दया नहीं होती है। सिख धर्म भी लोगों को मांस-मदिरा सेवन नहीं करने की सलाह देता है। इस धर्म में भी मांसाहार का कड़ा विरोध किया जाता है, तथा अगर मांस-मदिरा खाने वाला व्यक्ति कुछ भी धार्मिक क्रिया या अनुष्ठान करता है, तो वह व्यर्थ ही होता है। गुरुनानक देव जी ने मुसलमानों के प्रति उपदेश देते हुए कहा कि कुरान में लिखा है, कि राक्षस कोई और नहीं होता वह तो शराबी और कबाबी होता है। बौद्ध धर्म में कहा गया कि आर्य पुरूष ख़ून और मांस का सेवन नहीं करते। उनके लिए शाकाहारी भोजन श्रेष्ठ है। जैन धर्म के अनुसार जैनाहार विज्ञान का मूल आधार अहिंसा है। हमें हमेशा शाकाहारी भोजन खाना चाहिए। भगवान महावीर स्वामी ने कहा था, कि जीव-जंतुओं की रक्षा करो। ‘जियो और जीने दो’ यानी सभी प्राणियों को जीने का अधिकार है। यही सच्चे मनुष्य का कार्यत्व है। तभी तो जैन धर्म आज शाकाहारी है। इन्होंने लोगों को मांस-मदिरा व अंडे खाने या इन चीजों का सेवन करने का कभी भी कोई उपदेश नहीं दिया। इन सभी का यही कहना है कि शाकाहार ही मनुष्य के जीवन की संजीवनी है। यह अनमोल मोती के समान है। व्यक्ति के उत्तम चरित्र की धरोहर शाकाहार भोजन है। अपनी प्राचीन संस्कृति की रक्षा अगर हमें करनी है, तो हम सभी को मांसाहार का त्याग करना पड़ेगा। मांसाहारी व्यक्ति के हृदय में दया, प्रेम और करुणा नहीं होती है। उसका मन पाप के अंधेरे में भटकता जाता है। हमें चाहिए, कि हम हिंसा का रास्ता त्यागें और इस परम सत्य को पहचानें कि मांसाहार और पशु-पक्षियों के साथ क्रूर त्रासदी व हिंसा से हमें क्या लाभ हैं ? अपने मन में इन सभी बातों का अनुकरण करें। तभी हम विश्व में शाकाहार की कल्पना कर सकते हैं। मनुष्य को चाहिए कि वह अपने शरीर की रक्षा करे, तथा अनेक बीमारियों से बचने के लिए शाकाहारी भोजन का सेवन करें, क्योंकि शाकाहारी भोजन मनुष्य के लिए सर्वश्रेष्ठ है। हमारे सभी धर्मों की भी मान्यता है कि श्रेष्ठ भोजन सिर्फ शाकाहारी भोजन है। हम इस सत्य को जानें कि मांसाहारी भोजन व हिंसा महा-पाप है। इस्लाम के पवित्र तीर्थ मक्का स्थित कस्बे के चारों और कई किलोमीटर में घेरें में किसी भी पशु-पक्षी के कत्ल की मनाही है। यहाँ तक कि हवाई जहाज में शराब रख कर उसके ऊपर से उड़ान भी नहीं भरी जाती है। वहीं हज की अवधि में यात्रा करने वालों के लिए मांस-मदिरा का सर्वथा त्याग भी जरूरी है।
कई वैज्ञानिक, जैसे-अल्बर्ट आइंस्टीन विशुद्ध शाकाहारी रहे। जैन मुनि उपाध्याय गुप्ति सागर जी ने कहा था कि मांसाहार मनुज का मरघट है, यह मानवीय आहार नहीं है। स्वामी विवेकानंद जी के अनुसार “लोग नगर दिगं करें, मरघट को स्थान। वाह रे मांसाहारी तूने घर को किया मसान।”
हमें चाहिए कि हम सभी शाकाहारी बनें और भोजन में शुद्ध आहार ही लें, क्योंकि सभी धर्मों में शाकाहार ही श्रेष्ठ है। जीवन के इस पथ पर एक कदम और आगे बढ़ते हुए मांसाहार का जीवन से परित्याग करें, क्योंकि यह मानवीय आहार नहीं है। इस लिए हमें संतुलित आहार शुद्धता के साथ ही लेना चाहिए, क्योंकि जैसा खाएंगे अन्न, वैसा ही होगा हमारा मन।

शाकाहारी भोजन के प्रति जागरूकता फैलाना बहुत जरूरी है, क्योंकि सभी धर्मों में शाकाहार ही श्रेष्ठ माना गया है।