सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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अजनबी को गले से लगाया था मैंने,
जो वादा किया वो निभाया था मैंने।
प्यार की राह पर घर बसाया कभी-
अपना सब कुछ उसी पर लुटाया था मैंने॥
संसार में सब कुछ बस एक सपना है,
यहाँ कुछ भी तो नहीं अपना है।
जिसके भाग्य में लिखा है जितना-
उतना ही तो उसको मिलना है॥