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सामाजिक सरोकार निर्मित करती है शील कौशिक की लघुकथाएं

पटना (बिहार)।

लघुकथा अपने सीमित कलेवर में व्यापक जीवन सत्य को अभिव्यक्त करने वाली सशक्त विधा है। कम शब्दों में गहरी संवेदना और सामाजिक यधार्थ को उकेरना ही इसकी मूल विशेषता है। सामान्यत: ‘जिद’ को सकारात्मक अर्थों में देखा जाता है, किंतु डॉ. शील कौशिक ने अपनी इस लघुकथा ‘जिद अच्छी है’ में जिद को मानवीय और सकारात्मक संदर्भ प्रदत्त किया है।
भारतीय युवा साहित्यकार परिषद के तत्वावधान में हुए लघुकथा सम्मेलन में संयोजक सिद्धेश्वर ने यह बात कही। पढ़ी गई लघुकथाओं पर अपार संतोष व्यक्त करते हुए अध्यक्षीय टिप्पणी में शील कौशिक ने कहा कि लघुकथाओं में विषय की विविधता देखनी को मिली है। लगभग सभी लघुकथाएं विषय पक्ष पर खरी उतरी हैं। कुछ लघुकथाओं के शीर्षक और अंत पर दोबारा काम करना होगा।
इस सम्मेलन को सपना चंद्रा, ऋचा वर्मा, शेख शहजाद, अनिता पांडा व निर्मला कर्ण आदि ने अपनी लघुकथाओं से यादगार बना दिया।
प्रभारी ऋचा वर्मा ने सभी के प्रति धन्यवाद व्यक्त किया।