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हिन्द की नारी

कुमारी ऋतंभरा
मुजफ्फरपुर (बिहार)
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हम हैं हिन्द की नारी,
बस देश के लिए ही कुछ काम करना है
इसमें ना कोई भी अंदेशा है,
हैं हम हिन्द की नारी।

तुम क्यों अब गुफ्तगू में बैठे हो ?
क्यों तुम कायरता में समय खोए हो
करना है अब मुझे देश की सेवा,
क्यूँ तुम फालतू-सी बातों में!

क्यूँ उसमें तुम अब देर करते हो,
कर दे तू कुछ काम ही ऐसा
जाग उठी है ऐ दुनिया सारी,
क्यूँ तुम भाग्य के भरोसे बैठे हो!

हम हैं हिन्द की नारी,
कहाँ अब मुझको चैन आता है।
हमें तो बस जीना देश की खातिर,
हर हिन्द की नारी में आत्मविश्वास जगाना है॥