सरोज प्रजापति ‘सरोज’
मंडी (हिमाचल प्रदेश)
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कितनी मनभावन तान हिन्दी,
महके जग में, पहचान हिन्दी
सुरम्य सरलीकृत भाष हिन्दी,
अपने मुल्क की छवि मान हिन्दी।
रखते सबसे कमतर हिन्दी,
पर आत्मविश्वास, तलाश हिन्दी
सभ्य संस्कृत मातु विस्तार हिन्दी,
रस, छंद अलंकृत गान हिन्दी।
समस्त विषयों पर राज हिन्दी,
बगिया महके भर-भाव हिन्दी
विपरीत-विशेषण कोष हिन्दी,
विधि-भाष-विज्ञान-सिद्धांत हिन्दी।
सुलझा गुण-दोष प्रज्ञानभरी,
लक्षणा अविधा सह व्यंग्य भरी
सुभ्र, साहित्य में रस कौतुक-सी,
निखरे व्यक्तित्व, अलंकृत-सी।
अनुशासन सामंजस्य भरती,
मुरली धुन-सी लयता भरती
प्रिय राग विहाग उन्माद हिन्दी,
गिरते परिणाम, उम्मीद हिन्दी।
प्रसन्न मन की पदगायन-सी,
गरिमा-महिमा विमला छवि-सी
पद्य में लयता गद्य में रसता,
अति पावन भाष रसाल भरी।
सज के हिम की सरताज बने,
तिरस्कार सहे प्रतिष्ठा न मिले
अनुरूप सही रुतबा न मिले,
फर्ज हो सबका, विश्व स्तर मिले।
अग्र दुंदुभि राग चहुं सज के,
अपनी सर्वश्रेष्ठ हिन्दी दमके
कवि कंठ निनाद उत्साह घिरे,
मिल के पद राज व काज सजे।
पढ़ते जब आसव-सी मिसरी,
नृत्य गायन-वादन में लहरी।
कवि-लेखक की पदचाप हिन्दी,
अभिभान मुझे हिय वास हिन्दी॥
परिचय-सरोज कुमारी लेखन संसार में सरोज प्रजापति ‘सरोज’ नाम से जानी जाती हैं। २० सितम्बर (१९८०) को हिमाचल प्रदेश में जन्मीं और वर्तमान में स्थाई निवास जिला मण्डी (हिमाचल प्रदेश) है। इनको हिन्दी भाषा का ज्ञान है। लेखन विधा-पद्य-गद्य है। परास्नातक तक शिक्षित व नौकरी करती हैं। ‘सरोज’ के पसंदीदा हिन्दी लेखक- मैथिली शरण गुप्त, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ और महादेवी वर्मा हैं। जीवन लक्ष्य-लेखन ही है।
