सरोज प्रजापति ‘सरोज’
मंडी (हिमाचल प्रदेश)
***************************************
मकर संक्रांति पर्व है आया,
घर-घर खुशियाँ खूब लाया।
बच्चों की निकल गई है टोली,
मांग, घर-घर लोहड़ी टोली।
मूंगफली, रेवड़ी संग मिठाई,
लोहड़ी गाते, मंगल बधाई।
पैसे, आशीष पूर्वज बांटे,
नाना-नानी प्रेम, बुलाते।
दिन की अवधि थोड़ा सरके,
सर्द हवाएं हौले-हौले सरके।
सूरज मानो रजाई ओढ़े,
बचकर सर्दी दुबक कर बैठे।
घी, दूध, खिचड़ी, तिल के मिष्ठान बनाएं,
बांटे, खाएं, रौनक भाए।
हाथ लगाएं, नीर है सताए,
सर्दी अपना प्रभाव बताए ।
मकर संक्रांति अपना असर बताए,
दिनकर आराधना, प्रतिदिन मनाएं।
नाचें-गाएं, खुशियाँ मनाएं,
बारी-बारी त्योहार मनाएं॥
परिचय-सरोज कुमारी लेखन संसार में सरोज प्रजापति ‘सरोज’ नाम से जानी जाती हैं। २० सितम्बर (१९८०) को हिमाचल प्रदेश में जन्मीं और वर्तमान में स्थाई निवास जिला मण्डी (हिमाचल प्रदेश) है। इनको हिन्दी भाषा का ज्ञान है। लेखन विधा-पद्य-गद्य है। परास्नातक तक शिक्षित व नौकरी करती हैं। ‘सरोज’ के पसंदीदा हिन्दी लेखक- मैथिली शरण गुप्त, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ और महादेवी वर्मा हैं। जीवन लक्ष्य-लेखन ही है।