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हमारी पीढ़ी छोड़कर…

संजय एम. वासनिक
मुम्बई (महाराष्ट्र)
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आज के दौर में ‘सीनियर सिटीजन’
कहलाती हमारी पीढ़ी है,
आने वाले दस-पंद्रह बरस में
जो लुप्त होने की कगार पर है,
हमारी पीढ़ी बिल्कुल ही अलग है
यह पीढ़ी संसार को छोड़कर जाने वाली है।

रात को जल्दी सोने वाली,
सुबह को जल्दी उठने वाली
भोर में टहलने निकलने वाली,
आँगन में पौधों को पानी देने वाली
पूजा के लिए फूल तोड़ने वाली,
नियमित पूजा-अर्चना करने वाली
मंदिर-मस्जिद-गुरुद्वारा-चर्च, विहार जाने वाली,
रास्ते में मिलने वालों से हाल-चाल पूछने वाली
एक-दूजे का सुख-दु:ख जानने वाली,
दोनों हाथ जोड़कर प्रणाम करने वाली
प्रार्थना किए बिना अन्न ग्रहण न करने वाली,
यह पीढ़ी संसार को छोड़कर जाने वाली है।

हमारी पीढ़ी का संसार है थोड़ा अजीब,
तीज त्यौहार, मेहमान-नवाज़ी
शिष्टाचार, धन-धान, सब्ज़ी-भाजी,
तीर्थयात्रा और रीति-रिवाज़ी
धर्म के इर्द-गिर्द घूमता जीवन
यह पीढ़ी संसार को छोड़कर जाने वाली है।

पुराने फोन इस्तेमाल करने वाली,
फोन नम्बर डायरी में लिखकर रखने वाली
गलत नम्बर से भी बातचीत कर लेने वाली,
अख़बार को दिन में दो-तीन बार पढ़ने वाली
अमावस्या, पूर्णिमा हमेशा याद रखने वाली,
अपनी आस्था पर प्रबल विश्वास रखने वाली
“क्या कहेगा समाज ?” यह डर पालने वाली,
यह पीढ़ी संसार को छोड़कर जाने वाली है।

पुरानी चप्पल, बनियान और चश्मा पहनने वाली,
गर्मियों में अचार-पापड़ सिंवय्याँ बनाने वाली
घर का पुराना सामान संभालकर रखने वाली,
हमेशा देशी टमाटर, मटर, बैंगन और
ताज़ी साग-सब्ज़ी खोजकर ख़रीदने वाली
यह पीढ़ी संसार को छोड़कर जाने वाली है।

“अभी तक नहीं आया, बहुत देर हो गई”
ऐसा कहकर इंतज़ार करने वाली,
‘बेटा’ कहकर बुलाने वाली
हर बीमारी पर नज़र उतारने वाली,
यह पीढ़ी संसार को छोड़कर जाने वाली है।

संतोषभरा, ईमानदार और सादा जीवन,
मिलावट और दिखावे से दूर जीवन
सबकी फ़िक्र करने वाला आत्मीय जीवन,
सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा से जीने वाली
यह पीढ़ी संसार को छोड़कर जाने वाली है।

क्योंकि सही मायनों में,
हमारी पीढ़ी मानव इतिहास की
वह आख़िरी पीढ़ी है
जो धीरे-धीरे दुनिया छोड़ते जा रही है,
जिसने औद्योगिक और विज्ञान की क्रांति देखी
जिसने अपने बड़ों की भी सुनी,
और अपने छोटों की भी सुनी !
हो सके तो इस पीढ़ी के पदचिह्नों पर,
चलने की कोशिश करना ज़रूरी है
उनका सम्मान करना ज़रूरी है,
उन्हें अपना प्यार देना ज़रूरी है
उनका ख्याल रखना ज़रूरी है।
उन्हें समय देना सबसे ज़रूरी है,
क्योंकि यह पीढ़ी संसार को छोड़कर जाने वाली है॥