इंदौर (मप्र)।
लघुकथा लिखना आसान नहीं कठिन और चुनौतीपूर्ण कार्य है। एक गंभीर लघुकथा लिखने में लघुकथाकार को लंबा समय लग जाता है। डाॅ. योगेंद्रनाथ शुक्ल की लिखी लघुकथाओं में भाषा, शिल्प की सादगी के साथ-साथ गहराई और मौलिकता है जो उन्हें विशिष्ट बनाती है।
वरिष्ठ साहित्यकार सूर्यकांत नागर ने यह बात इंदौर प्रेस क्लब के सभागृह में शनिवार शाम को कही। अवसर रहा वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. योगेन्द्र नाथ शुक्ल के चतुर्थ हिंदी लघुकथा संग्रह ‘चुप्पी के नेपथ्य में’ और १३वीं अनूदित कृति ‘बदलता भारत'(उर्दू) के लोकार्पण अवसर पर अध्यक्षीय उद्बोधन का, जो ‘विचार प्रवाह साहित्य मंच’ के बैनर तले आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि अरबी-उर्दू की विदुषी व वरिष्ठ अधीक्षक राजभाषा (देवी अहिल्याबाई होलकर विमान पत्तन, इंदौर) श्रीमती नाजमा खान ने कहा कि डाॅ. शुक्ल की लघुकथाएं सम-सामयिक विषयों पर केंद्रित और सकारात्मकता का भाव लिए हुए हैं। पुस्तक चर्चाकार पूर्व विभागाध्यक्ष डाॅ. हदीस अंसारी ने कहा कि डाॅ. शुक्ल की लघुकथाओं में विचारों की बुलंदी और समंदर-सी गहराई है। जब यह बादल बनकर रिमझिम बारिश के रूप में बरसती है तब पाठक को अपने मुल्क, सभ्यता, संस्कृति की रंगत में एक नवीन एहसास कराती है।
वरिष्ठ लेखिका श्रीमती सुषमा दुबे ने कहा कि यह लघुकथा संग्रह किसी कार्यशाला की भांति है जिसमें शामिल लघुकथाएं पढ़कर नए रचनाकार उससे लघु कथा लिखना सीख सकते हैं।
लोकार्पण अवसर पर मंच पर श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति के सभापति राष्ट्रकवि सत्यनारायण सत्तन, क्लब के पूर्व अध्यक्ष अरविंद तिवारी, पत्रिका ‘वीणा’ के संपादक राकेश शर्मा और अनेक ख्यात साहित्यकार उपस्थित रहे।
संचालन मुकेश तिवारी ने किया। आभार अर्चना मंडलोई ने माना।