कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’,
हैदराबाद (तेलंगाना)
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मुझसे ही बातों की माला पिरोने का वादा करते,
मुझे ही अपना संसार बताने का दावा करते
सच्चाई की छाया बन साथ चलने की बातें करते,
और मुस्कानों के पीछे दूसरा मार्ग चुन लेते।
“तुम ही मेरा विश्व हो” कहकर जताते अपनापन,
पर दुनियाभर से भी रखते सम्बंध
मुझे अनजान रखकर किसी और की चौखट पर,
धीमे स्वर में बाँट आते अपने मन का छंद।
शब्दों से जाल बुनने वाले ये लोग,
विश्वास को मानो सिक्कों-सा खर्च करते
रिश्तों की डोर को ढीला कर,
स्वार्थ के राग में सुर भरते।
हे द्विचरित्र व्यक्तियों!
सत्य सूर्य है-एक दिन अवश्य उदय होगा
चेहरों पर ओढ़े हुए मुखौटे,
समय की हवा में स्वयं ही गिर जाएगा।
टिकेगा वही जो सच्चा है-
विश्वास ही है अटल संबंध।
अभिनय से जीते क्षण क्षणभंगुर,
ईमान से जीता जीवन अनंत॥
परिचय – कवि व अनुवादक कमलेकर नागेश्वर राव का साहित्यिक उपनाम ‘कमल’ है। आप सरकारी अध्यापक (हिंदी) ने रूप में जिला नागर कर्नूल के वेल्दंडा में कार्यरत हैं। तेलंगाना राज्य के रंगा रेड्डी जिले में निवासरत ‘कमल’ की तेलुगू और हिंदी के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में कविताएँ व विशेष आलेख प्रकाशित होते रहते हैं। इनको श्री श्री कला वेदिका राजमंड्री वालों से ‘साहिती मित्रा’ पुरस्कार, आदित्य संस्कृति (मप्र) से ‘हिंदी सेवी’ तथा डाॅ.सीता किशोर खरे स्मारक साहित्य पुरस्कार आदि मिले हैं।