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होली में…

सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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होली विशेष…

गुलाबी गाल की बातें, रंगीले ख़्वाब की बातें,
पुरानी हो चुकी है सब, ये नदियाँ पार की बातें
पकड़ कर साथ चलते हैं, सभी का हाथ होली में,
नया कुछ कर दिखाते हैं, चलो इस बार होली में।

कुंडली मार कर बैठा है, यह जो नाग नफरत का,
दंभ और द्वेश ने फैला दिया है, जाल नफरत का
प्रेम की करते हैं बरसात, यूँ इस बार होली में,
होलिका में जलाते हैं, यही सामान होली में।

कहीं पर युद्ध की गर्मी, कहीं आतंक फैला है,
दिखावे, झूठ और धोखे का जो व्यापार फैला है
चलो मिल कर बताएँ होता क्या परिणाम होली में,
सम्हल जाओ, अभी है वक्त कर लो प्यार होली में।

भ्रष्टाचार इतना बढ़ गया, कुछ कर नहीं पाते,
रंगे सब एक रंग में है, सफ़ाई दे नहीं पाते
है नेताओं की मनमर्जी, करें व्यापार होली में,
इन्हीं का बोल-बाला है, बिगाड़े काम होली में।

समर्पण वृक्ष से सीखो, हवा और फूल, पानी से,
मधुर व्यवहार हो सबसे, ये सीखो दादी-नानी से।
करें हम वेश-भूषा संस्कृति का सम्मान होली में,
नया कुछ कर दिखाते हैं, चलो इस बार होली में॥