बसंतिया भ्रमर
संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* वन उपवन खिले-खिले से, मुकुल नवथर प्रचुर है,खिल रहा बागान, कानन में कली कली का अधर हैचमन-चमन हर सुमन-सुमन की आयी नई बहार है,बसंत ऋतुराज वसुधा को अब, लुटाने लगा उपहार है। हर तरफ गुनगुना रहे कुसुमों पर भ्रमर दल बल,परागों से जैसे फूट पड़ी है स्वर-स्वरों की हलचलभंवरा-भंवरा कली सुमन … Read more