बसंतिया भ्रमर

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* वन उपवन खिले-खिले से, मुकुल नवथर प्रचुर है,खिल रहा बागान, कानन में कली कली का अधर हैचमन-चमन हर सुमन-सुमन की आयी नई बहार है,बसंत ऋतुराज वसुधा को अब, लुटाने लगा उपहार है। हर तरफ गुनगुना रहे कुसुमों पर भ्रमर दल बल,परागों से जैसे फूट पड़ी है स्वर-स्वरों की हलचलभंवरा-भंवरा कली सुमन … Read more

कल्पकथा सम्मान समारोह में देशभर के साहित्यकार सम्मानित

सोनीपत (हरियाणा)। प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार द्वारा सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसमें देशभर के विद्वान साहित्यकार सम्मानित हुए। डॉ. गजेंद्र हरिहारनों ‘दीप’ के मुख्य आतिथ्य और वरिष्ठ अधिवक्ता-समाजसेवी कुमुद रंजन सिंह नालंदा (बिहार) की अध्यक्षता में यह सम्मान किया गया।संवाद प्रभारी ज्योति सिंह ने … Read more

व्यंग्यात्मक लहजे में दिशा दिखाता है कवि, वह असली समाज सुधारक

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विमोचन… इंदौर (मप्र)। समाज व राष्ट्र को सुधारने के लिए कवि अपने व्यंग्यात्मक लहजे से दिशा दिखाने का काम करता है। वह सही में असली समाज सुधारक है। कबीर दास जी ने कितने लोगों को उनका असली चेहरा दिखाया, तभी तो आज भी उन बातों की प्राथमिकता प्रासंगिक है, क्योंकि कवि, व्यंग्यकार किसी को छेड़ता … Read more

संविधान ? हर कोई मांग रहा आरक्षण

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** संविधान से आम आदमी तक (२६ जनवरी विशेष)…. मेरा मन बहुत उदास है। बहुत दुखी भी है। मन में बहुत क्षोभ और आक्रोश है। न जाने कितनी ही बातें जहन में कौंध रही हैं। हमारे संविधान निर्माताओं ने क्या सोचकर संविधान बनाया था। उस समय यह कहा गया था कि १० वर्ष … Read more

बहुआयामी व्यक्तित्व थे जयशंकर प्रसाद

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* हिंदी साहित्य के आकाश में जिन नक्षत्रों की ज्योति युगों तक आलोकित रहेगी, उनमें महाकवि जयशंकर प्रसाद का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित है। वे छायावाद के शिखर स्तम्भ, रहस्यवाद के गम्भीर चिन्तक, स्वाधीनता संग्राम के क्रान्तिधर्मी उदघोषक तथा आधुनिक हिंदी नाटक के अप्रतिम शिल्पी थे। उनका व्यक्तित्व बहुआयामी था … Read more

ज़िंदगी इम्तिहान लेती है…

डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* फूलों के साथ काँटों का हमें भान देती है,ज़िंदगी कभी गम तो कभी खुशी का दान देती है। ज़िंदगी हमेशा हमारा इम्तिहान लेती है,कभी हमें अपनेपन का भान देती है। आते हैं कभी खूबसूरत पल ज़िंदगी में,ज़िंदगी हमें भी सदा सच्चा मान देती है। फासले बढ़ते रहे दिल से … Read more

रिश्तों की धूप में पनपती ज़िंदगी और भविष्य

पूनम चतुर्वेदी शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)************************************** आज का समय तेज़ रफ्तार का समय है। सुबह आँख खुलते ही मोबाइल की स्क्रीन, अधिसूचना (नोटिफिकेशन) की कतार, व्हाट्सएप के संदेश, सोशल मीडिया की सुर्खियाँ और ब्रेकिंग न्यूज़-इन सबके बीच हम जीवन जी रहे हैं। इस भाग-दौड़ में सबसे ज़्यादा जो पीछे छूट रहा है, वह है-ठहराव, संवाद और संवेदना। … Read more

यह चेहरे…

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ रिश्तों के रंग ‘बदलते’ यह चेहरे,ज़िंदगी में क्यों साथ छोड़ देते हैं ?उम्मीदों का यह दामन ना जाने क्यों खत्म हो रहा,लगता है उनके चेहरे पर नकाब लगा है। क्यों डुबा हुआ हूँ मैं तेरे प्यार में!हर वक़्त तुझे ही तलाशता रहता हूँपर तूने साथ छोड़ दिया है मझधार में…रिश्तों … Read more

अभूतपूर्व कल्पना शक्ति थी वृन्दावन लाल वर्मा में-डॉ. बिसारिया

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लखनऊ (उप्र)। वृन्दावन लाल वर्मा अपने साहित्य में हमें एक अलग तरह के इतिहास से परिचित कराते हैं। वृन्दावन लाल वर्मा के ‘झाँसी की रानी’ उपन्यास में नारी सशक्तिकरण का अभूत पूर्व चित्रण मिलता है। वर्मा जी में अभूतपूर्व कल्पना शक्ति थी, जिसे उन्होंने अपनी रचनाओं में प्रयोग किया है।लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान … Read more

पुस्तक ‘हिन्द से हिंदी’ का विमोचन किया प्रहलाद पटेल ने

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सेंधवा (मप्र)। विश्व संवाद केंद्र मालवा प्रान्त और पत्रकारिता एवं जनसंवाद अध्ययनशाला (देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर) द्वारा संस्कृति विभाग (मप्र शासन) के सहयोग से आयोजित ‘भारत उदय’ (नर्मदा साहित्य मंथन) साहित्योत्सव में सेंधवा निवासी शिक्षक विजय पाटिल की पुस्तक ‘हिंद से हिंदी’ का विमोचन प्रहलाद पटेल (कैबिनेट मंत्री, मप्र) ने किया। तक्षशिला परिसर में हुए … Read more