माहे रूह
डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’जोधपुर (राजस्थान)************************************** यूँ ही सा वास्ता है किसी माहे रूह के साथ।जीना हुआ मुहाल मेरा आबरू के साथ। मंजिल करीब आई तो मकसूद अब नहीं,यह हादसा हुआ है मेरी आरज़ू के साथ। इतना सहल न जानिए है राहे हयात को,होते हैं गुल में कर भी तो रंगों बू के साथ। मुझ-सी गुनाहगार … Read more