दर्पण जैसा स्वच्छ हो हर काम
ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** दोहा आधारित ग़ज़ल… दरपन निरख-निरख लटे, साजते बार-बार।एक बार देखा नहीं, निज आचार विचार॥ दर्पण जैसा स्वच्छ हो, जीवन का हर काम।धब्बे लगे न काँच में, मुख होगा अँधियार॥ सत्य सदा दिखला नहीं, दर्पण बनना छोड़।तोड़ हृदय न काँच-सा, रोको मन पुचकार॥ दर्पण दिखलाता हमें, अति दूर की वस्तु।दृष्टि दूरदर्शी बने, मन … Read more