रहे आचरण निष्कलुष
प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* रहे आचरण निष्कलुष, तो आता मधुमास।अपनाकर पावन चलन, मानव बनता ख़ास॥ होना अच्छा आचरण, है विशिष्टता-रूप।जिससे खिलती चाँदनी, बिखरे उजली धूप॥ जिनका सँवरा आचरण, वे देते उजियार।द्वेष,कपट सब दूर हों, होती तब जयकार॥ अंतर्मन में नम्रता, अधरों पर मृदु बोल।बिना दोष का आचरण, होता है अनमोल॥ रीति,नीति हमसे कहें, सदा आचरण … Read more