हमारा अखंड भारत सम्पन्न भारत

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ************************************************************* मैं हूँ हिंदूतुम मुसलमान,तेरा है कुरानरामायण मेरा ईमान,पर सबसे आगे हैहमारा हिंदुस्तान और-हम दोनों ही हैं इंसान। मेरा लहू लालतेरा भी है लाल,मैं भारत माँ का बेटातू भी नहीं हो छोटा,भले तू पढ़ता नमाज़प्रार्थना करता मेरा समाजदोनों ही रह रहे हैं खुश-फिर कैसे होने लगे नाखुश। नाखुशी का कारण है … Read more

जाने दो जाने वाले को

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* जाने दो जाने वाले को, नाहक चिन्ता तुम करते हो,उठो जाग चल पौरुष नव पथ, नव नई सोच तुम गढ़ते होपृथक-पृथक चिन्तन अन्तर्मन, नाश व्यर्थ वक्त तुम करते हो,आलम्बन उद्दीपन मानस, देशार्थ मार्ग तुम बढ़ते हो। जाने दो जाने वाले को, नि:स्वार्थ सार्थ क्यों बनते हो,वक्त नजाकत समझ बन्धुवर, … Read more

बहुत हो चुके रक्ताभिषेक

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* महामृत्युँजय के निरंतर जाप में, जैसे निकल रही हो प्रेत यात्राएंठीक वैसे ही आज हो रही है, पर्यावरण की बेशुमार वलग्नाएंजय घोष ही जय घोष सब दूर पर्यावरण का, पर शून्य हो गई कृतिकाएंअरे! इन झूठे आदमियों को कोई तो संभालो, बहुत हो गई वलग्नाएं। यहाँ अहंकार की टसल मची है, … Read more

शुद्ध अन्न, स्वस्थ जीवन

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)****************************************** ‘विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस’ (७ जून) विशेष… हर थाली में हो जीवन की चमक,ना हो कहीं भी ज़हर की लपटविश्व खाद्य सुरक्षा का ये पैग़ाम,जगाएं इंसानियत का सच्चा काम। अन्न नहीं, बस रोटी का टुकड़ा,ये धरती का है अमूल्य उपहारपर क्या हर निवाला जो खाते,वो है वाकई सुरक्षित, सार ? देखो … Read more

बढ़ता जा रहा हमारा देश

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ ये हमारा देश है,विकासशील देशों में एकजो बढ़ता जा रहा हैभारत अब नहीं है किसी से कम,ये हमारा देश है। कन्याकुमारी से कश्मीर तक,हर क्षेत्र में आगे बढ़ताक्योंकि अब तस्वीरें बोलती सच की कहानी,ये हमारा देश है। तरक्की को पहचानने वाला,क़दम से क़दम मिलाकर आगे बढ़ने वालासभी को साथ में … Read more

आँखों ने अक्सर…

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* आँखों को अक्सर,खामोश रहकर भी गौर फरमाते देखा हैआँखों को अक्सर इशारों से,बातें करते हुए देखा है। आँखों में अक्सर,समंदर की अथाह में डूबे हैंआँखों ने अक्सर,कई गहरे राज़ छुपाए हैं। आँखों ने अक्सर,मन की थाह ली हैआँखों ने अक्सर,प्रेम का गीत गुनगुनाया है। आँखों ने अक्सर,वीरान रातों की कथा सुनाई … Read more

आओ, हम पेड़ लगाएँ

मंजू अशोक राजाभोजभंडारा (महाराष्ट्र)******************************************* आओ, चलो हम पेड़ लगाएँ,कुछ इस तरह से हरियाली लाएँ। आम और जामुन जब-जब खाएँ,उनकी गुठलियाँ जमा करते जाएँउन्हें अपने संग तब ले जाएँ,जब-जब सुबह शाम टहलने जाएँउन्हें सड़क के किनारे बस फेंकते चले जाएँ। न कोई मेहनत, न कोई झंझट,इस रीत को क्यों न हम सब अपनाएँइस बारिश का लाभ … Read more

पर्यावरण का नुकसान

हेमराज ठाकुरमंडी (हिमाचल प्रदेश)***************************************** मेरी रूह रोती है कांप-कांप कर,देख के पर्यावरण का नुकसानचिन्ता लगी है मन में इक भरी कि,हो न जाए कहीं यह धरती श्मशान। दया आती है तेरी करनी पर,तू कर क्या रहा है ओ इंसान ?सृष्टि रचाने वाले से डर जरा,तू क्यों बना है खुद भगवान… ? नदियाँ नाला हो रही … Read more

ससुराल के बीते दिन

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* स्वर्णिम युग ससुराल का, याद करे दामाद।पर अब कुछ भी है नहीं, केवल है अवसाद॥ ख़ातिरदारी है नहीं, अब सूना मैदान।बिलख रहे दामाद जी, रुतबे का अवसान॥ स्वर्णिम युग पहले रहा, खाते थे पकवान।अब तो सारे मिटे गए, ससुराली अरमान॥ कितना प्यारी थी कभी, जिनको तो ससुराल।उनको दुख अब सालता, अब … Read more

बढ़ते रहिए जीवन में

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* बढ़ते रहिए, जीवन में कुछ न कुछ करते रहिए,हिन्दी-हिन्दुस्तान प्रगति पथ गढ़ते रहिएपरमार्थ निकेतन लक्ष्य कर्मपथ संघर्षों,यायावर हमसफ़र राष्ट्र पथ बढ़ते रहिए। अरमानों उत्तुंग शिखर नित चढ़ते रहिए,राष्ट्रधर्म श्रीवर्धन रथ रण नित बढ़ते रहिएतनिक वक्त हो आत्मचिन्तना निज कृतकर्मों,स्वाभिमान निर्माण राष्ट्र नव गढ़ते रहिए। कहाँ नहीं बाधित जीवन श्रम … Read more