बात समझो

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर(मध्यप्रदेश)****************************************** पेड़ लगाएं,जीवन होगा न्याराताप घटाएं। बात समझोसंकट सिर परजान जाएगी। पानी समाप्तबिगड़ जाए चक्रमनुज खत्म। कटते तरुसूखा बड़ा पड़ेगाकौन बचेगा ? दें योगदानप्रकृति को समझेंपानी सहेजें। ये…

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धरती जैसे आग

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* बढ़ा ग्रीष्म का ताप अब, हाल हुआ बेहाल।झुलस रहे हैं जीव सब, सूख गए सब ताल॥ गर्म तवे-सी तप रही, सूखे वृक्ष तडाग।सूरज भी तड़पा रहा,…

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बचपन का आँगन

कमलेश वर्मा ‘कोमल’अलवर (राजस्थान)************************************* सबसे प्यारा बचपन का आँगन,भैया मेरे उस आँगन को सँवारे रखना। जिसमें बीता हमारा बचपन,उस आँगन संजोए रखना। नहीं चाहिए रूपया-पैसा,बचपन जैसा प्यार बनाए रखना। माँ…

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ताकतवर सिंदूर

दिनेश चन्द्र प्रसाद ‘दीनेश’कलकत्ता (पश्चिम बंगाल)******************************************* लाल रंग का एक भुरभुरा पदार्थ,इसमें छिपा रहता स्त्री का हितार्थ। अपनी मांग में स्त्रियाँ इसे भरती हैं,पतिदेव रहे सलामत, लम्बी उम्र की कामना…

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भक्ति जगा दो

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)************************************************ श्री शिवाय नमस्तुभ्यम... भक्ति जगा दो शंभु शिव, जीवन होवे धन्य।घट-घट वासी आप है, बना हमें चैतन्य॥ निभा सकूँ निज धर्म को, देना मुझको ज्ञान।कहे…

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प्रकृति का गठजोड़ है…

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ फल-फूल, पेड़-पौधे,रंग-बिरंगी दुनिया में प्रकृति का गठजोड़ हैयह एक-दूसरे के अपनेपन को बढ़ाते हैं,इसे हम पहचानेंप्रकृति को करीब से जानें। मौसम के विभिन्न रंगों में,…

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नैतिकता का ज्ञान

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* कहाँ बोध पुरुषार्थ का, नैतिकता का ज्ञान।बचा कहाँ संकोच अब, कहाँ अर्थ सम्मान॥ सूचक समझो अधपतन, अहंकार पद मोह।कदम बढ़े क्रोधाग्नि पथ, सत्ता पद…

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बिकते शब्द

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर(मध्यप्रदेश)**************************************** शब्द,मीठे-कड़वेबनाओ तो बन जातेशस्त्र,तीखे बाण-कानों को अप्रियआदेश। हौंसला, ढाढंस, ऊर्जा बढ़ातेमौत को टोक कररोक देते,उपदेशों से कर देते अमर। शब्दों का पालन,भाग-दौड़ भरी दुनिया से परेसिग्नल मुँह…

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यशोधरा का त्याग

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* यशोधरा का त्यागकर, गये तपोवन बुद्ध।यहाँ ज़िन्दगीभर हुआ, एकाकीपन से युद्ध॥ यशोधरा का सोच था, उसका क्या था दोष।जो पति ने ठुकरा दिया, नेह-प्यार का कोष॥…

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मन्नतों के धागे

डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* मन्नतों के अनगिनत धागे मैंने बाँध दिये।रात के बाद प्रात सूरज ने फिर सवाल किये॥ बादलों पर चित्र उकेरे और दिया संदेशा,आयेगा जवाब कोई मन…

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