दौड़ती थी सरपट
संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* साईकिल दिन की संध्या पर मुझे याद आ रही है मेरी वो साईकिल,जिसके प्यार में मैं सालों तक रहा डूबा,और कहीं नहीं लगता था दिलअगर माँ के बाद कुछ प्यारा था, तो वह केवल मेरी प्यारी साईकिल थीउन दिनों हम सब बच्चों की साईकिलें चलाते-चलाते लगती महफ़िलें थी। तीन चरणों में … Read more