दौड़ती थी सरपट

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* साईकिल दिन की संध्या पर मुझे याद आ रही है मेरी वो साईकिल,जिसके प्यार में मैं सालों तक रहा डूबा,और कहीं नहीं लगता था दिलअगर माँ के बाद कुछ प्यारा था, तो वह केवल मेरी प्यारी साईकिल थीउन दिनों हम सब बच्चों की साईकिलें चलाते-चलाते लगती महफ़िलें थी। तीन चरणों में … Read more

कश्ती कागज की

डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’जोधपुर (राजस्थान)************************************** अधजल गगरी छलकत जाय प्रणय,मिलन की आस में जीवन की रवानी। कागज की कश्ती बारिश का पानी,वो यादें बचपन की सुहानी। सुनाती जब नानी और दादी कहानी,आ जाती फिर निंदिया सुहानी। मौज-मस्ती के हिचकोले रंगीन यादें,वो नाव कागज की पानी में चलानी। सुंदरता बचपन की गुदगुदाती बातें,उछल-कूद के संग भीगे … Read more

मन घबरा रहा…

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ विश्व पर्यावरण दिवस (५ जून) विशेष…. जल रही धरती,ज़लज़ला आ रहाप्रकृति का यह तांडव,मन घबरा रहा। साँस लेने के लिए जरूरी हवा,वह भी दूषित व जहरीली हो चुकीबचाओ इस धरती माँ को,मन घबरा रहा। हरित क्रांति व ग्रीन हाउस को, सपने मत बनाओपेड़ लगाओ, आओ आगे आओ प्रकृति बचाओ,ईंट पत्थरों … Read more

पंछी की फरियाद

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* पेड़ और पानी से भरपूर था,घरौंदा डालियों पर झूलता थासभी पक्षी मस्ती मचाते थे,पेड़ पर पींगे लगाते थे। जाने किस दुश्मन का साया,प्यारे जंगल पर छाया थाएक-एक कर धीरे से उसने,सब, पेड़ों को कटवाया था। हरियाली सारी खत्म हो गई,पेड़ों की संख्या न्यून हो गई।दाने जाने कहाँ खो गए ?पानी के … Read more

नशा’ बे-पल- बे-मौत बुलावा

सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*********************************************** बात पते की हे जन ! जानो,नशा नशीला, मारक मानो हैबे-पल बे-मौत बुलावा,क्या है शान ? प्रतिपल छलावा। धीमा जहर, जीवन बुझाता,घनेरी यंत्रणा, अधम तृष्णाकैसी नियति दूभर, मजबूरी,क्रय-विक्रय है, लानत ‘दस्तूरी।’ शराब, भांग, सिगरेट, गांजा,तम्बाकू, गुटखा ‌है शिकंजा अय्याशी!,दूर-बुद्धि है लाता,नैतिक पतन, दूर-चरित्र होता। खास स्पर्धा, दिवस हैं मनाते,भाषण, नारे, … Read more

फिर हराओ ‘कोरोना’ को

संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )******************************** मानव जीवन था नज़र बंद,पक्षी-पौधे थे पूर्ण स्वछंदपर्यावरण हुआ स्वच्छ मंद,नहरों-नदियों में अंतर्द्वंद। दृष्टिगत हुई नदियाँ गहरी,पक्षी स्वयं समझे उड़नपरीदुनिया इंद्रधनुषी रही खड़ी,खुशहाली कर्फ्यू की भेंट चढ़ी। कल-कल नदियाँ आगे को बढ़ी,लहरें समुद्र की हिलोरे ले चढ़ी,हरियाली प्रकृति ने खूब गढ़ी,जीव-जंतुओं की फ़िक्र बड़ी। महामारी ‘कोरोना’ थी बहुत बड़ी,बढ़े सैनेटाइजर … Read more

लेंगे बदला

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)****************************************** चुन-चुनकर लेंगे बदला, ये भारत का ‘सिंदूर’ है।बहुत सह लिया तुझे, तोड़ना तेरा अब गुरूर है॥ भक्ति देखी, शांति देखी, अब देखेगा तू क्रांति भी।मजबूर किया है युद्ध को, तोड़ेंगे अब हर भ्रान्ति भी।काँपेगा हर दुश्मन, जो मगरूर है,चुन-चुनकर लेंगे बदला…॥ उग्र है सेना, प्रचंड-अखंड भाव है,हर सैनिक के चेहरे पर … Read more

सायकिल की सवारी

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** सुनो सायकिल बड़े काम कीएक सायकिल रखना पास,इसमें इतने सारे गुण हैंसबके लिए बहुत ही ख़ास। बच्चे-बूढ़े सभी चलातेमत करना इसका उपहास,नहीं बहुत महँगी यह आतीहै यह सुलभ सभी के पास। बैठाओ आगे बच्चे कोपत्नी को पीछे बैठाओ,नहीं लगे पेट्रोल का खर्चाले परिवार घूम कर आओ। रोज़ सबेरे करो सवारीपैरों की कसरत … Read more

आते-जाते रहेंगे तूफान

मंजू अशोक राजाभोजभंडारा (महाराष्ट्र)******************************************* एक शहर में मैंने देखा,ऐसा भयानक तबाही का मंजरवहाँ कुछ पल पहले ही,थमा था तूफान आकर। कुछ लोग थे उदास,अपना बहुत कुछ खोकरकुछ लोग थे,बिलख-बिलख कर रो रहे। कुछ लोग ऊपर वाले से,शिकायत थे कर रहेलेकिन एक परिवार,धन्यवाद था कर रहा। उन बिलखते हुए व्यक्तियों ने,उसके पास जाकर जब पूछा-तुम सब … Read more

ओ मानुष ! काहे ? फिरे मारा-मारा

प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’सहारनपुर (उप्र)************************************************** ओ मानुष ! काहे ‌? फिरे मारा-मारा,ये संसार चार दिनों को ही है तुम्हारा। माया जाल में फंसकर,भूल न जाना प्रभु कोसुमिरन में समय खर्च,घूम ना बंजारा। पैसों में रमो नहीं ,भोग में भी रमो नहींप्रभु-प्रेम रम जाओ,मत बनो आवारा। मन से सब बंधन हैं,मन से ही छूट जाएँप्रभु-प्रीत … Read more