जब मैं अकेले…
डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* तब पीड़ा नहीं होती,जब मैं अकेले में रोती हूँचोट तब लगती है जब,अकेले में जश्न मनाती हूँ। तब दर्द नहीं होता,जब मैं अकेले सो जाती हूँकष्ट तब होता है जब,उठकर खुद को अकेला पाती हूँ। तब आहत नहीं होती हूँ,जब मैं अकेले रहती हूँतब होती हूँ जब मेरी,अनुपस्थिति ज्ञात नहीं होती। … Read more