मैं घड़ी, वक़्त प्रियतम
सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*********************************************** दौड़ती, टिक-टिक मैं घड़ी हूँ,समय-प्रियतम प्रेयसी मैं हूँसमस्त जग वश, समय घड़ी हूँ,प्रेयसी सह-प्रिय सदा मैं हूँ। उच्चतम दर क्रय दे सजाते,शान-शौकत अहम इठलातेवाह! खूब, रह-रह इतराते,भान, मुझे तब सिर्फ सजाते। उद्विग्न, देख निज अनदेखी,उपेक्षा, फिसल रेत हथेलीधिक् तुम्हें! पूँजी लम्हें खाली,झरे स्वप्न! क्षण न कद्र, देखी। मुद-मंगल करमूल सुहाती,गफलत … Read more