काव्यभाषा
दीदार हो जाए
डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’जोधपुर (राजस्थान)************************************** आओ न उनका एक दीदार हो जाए,बेचैन दिल फिर एक बार मौन हो जाए। आओ तस्वीर दिखाऊँ एक महबूब की,दिल में बसी यादें वो भी पुरजोर हो जाए। मेरा गम बड़ा गमगीन है जिसने गम,दिया वही काश! मरहम भी लगा जाए। हम तो बेकशी के तसव्वुर में आए हैं,हजारों दिलो … Read more
सपनों की लाशों के बीच
संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* भरी ग्रीष्म में जब बेमौसम वर्षा ने उत्पात मचाया,बारिश पहले किसानों की आँखों में दर्द उतर आयाबड़ी मेहनत से उगाया था धरा की गोद में प्याज का लाल सोना,रातों-रात हुई बेमौसम वर्षा ने बरस-बरसकर ला दिया रोना। अब किसान भीगे हुए प्याज के ढेरों बीच बैठकर,ढा रहा है आँसुओं की बारिश … Read more
बेड़ियाँ तोड़ी
अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)****************************************** राजा राममोहन राय जन्म जयन्ती (२२ मई) विशेष.. राजा निराले,राममोहन रायबेड़ियाँ तोड़ी। सती प्रथा थी,जलती थी महिलाकुरीति तोड़ी। अमर हुए,समाज का संबलमुक्ति दिलाई। अद्भुत राजा,सदा प्रजा हितैषीबने आवाज़। किया प्रहार,जकड़ी थी प्रथाएँतोड़ी दासता। बने मसीहा,किए बड़े सुधारमहामानव। सोची भलाई,ये बुराई से लड़ेथे अवतार। कभी न झुके,योद्धा थे क्रांतिकारीदिखे सुधार। जान लगा … Read more
हाय! गरमी प्रचंड
सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*********************************************** गरमी तेज़ प्रचंड हुई,किल्लत पय चहुं हुईपसीने से तर-बतर हो,ज़िंदगी दुश्वार हुई। लू बैरिन प्रचंड दहाड़,गर्मी विकट सताए हुएपसीना उभर-टपक रहा,धरती हाय! तौबा हुए। बड़ी मुश्किल आन पड़ी,होती है गुल बिजलीचल रही पंखी अहरनिश,ऋतु हठी तीक्ष्ण चली। शीतल पेय सदा भाता,रहती तकरार सदातृप्तिदायक हैं ये सभी,त्राण-प्राण पुष्ट सदा। ये गर्मी … Read more
मेरे अस्तित्व का रूप
डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* इस अनिश्चित जग में,मैं ठहर जाती हूँकुछ अनजान भय से। निरंतर काम करने,के बाद मैं दौड़ जाती हूँसुनसान पड़े खाली घर में। उस भरी महफ़िल में,रिश्तेदारों और दोस्तों से भरीअपने-आपको अकेला पाती हूँ। खूबसूरत-सी जगह पर,हँसी-मजाक के बीचखुशी को ढूंढती हूँ आस-पास। कठिन परिश्रम, निष्ठा और त्याग,के बावजूद मेरी परछाई हैमेरे … Read more
अहंकार को नष्ट करना होगा
संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* हर चीज़ जल रही है,आग की लपटें उठ रही हैये लपटें कहाँ से आ रही हैं ?मन के अंदर से शायद…! मन एक ज्वलनशील यंत्र है,यह उन सभी चीजों कोजला देता है, झुलसा देता है,जिन्हें हम देखते हैंजिसे हम सुनते हैं,जो हम सूंघते हैंजो हम चखते हैं,जिसे हम छूते हैंऔर जिस … Read more
काश! कोई पूछता..
दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* काश कोई पूछता मुझसे,पीड़ा व्यथित हृदय कीलगाता जो मरहम प्यार का,कुछ पीड़ा कम हो जाती। काश! कोई समझ पाता,मेरे दिल में उठता तूफानफिर हौले से दिखला जाता,राह मुझे खुशियों की। काश! कोई देख पाता,मेरे दिल के सूनेपन कोचुपके से बस जाता दिल में,दूर कर देता तन्हाइयों को। काश! कोई कर पाता महसूस,मेरे … Read more
संकट आया
डॉ.एन.के. सेठी ‘नवल’बांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* मिलकर किया विचार, संकट आया राष्ट्र पर।किया वार पर वार, छक्के छूटे शत्रु के॥ फैलाना है काम, दुनिया में आतंक को।मिला दुखद परिणाम, घाव दिया ऐसा उसे॥ दुश्मन है चालाक, रहना अभी सतर्क है।करे काम नापाक, संकट का करता सृजन॥ संकट ये घनघोर, मातृ भूमि पर आ गया।दिखा दिया है … Read more
भाग्य है बेटी
हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ बेटी खुशी है,सुख है समृद्धि हैबेटी आशा है,बेटी भाग्य है, विधाता है। नन्हें कदमों में वह लक्ष्मी,कर्म में वह सरस्वतीमाँ-बाप का आधार है,बेटी भाग्य है, विधाता है। बेटी घर का मान है, मर्यादा है,दो परिवारों का मजबूत नाता हैरिश्तों की डोर है, वह मजबूती में सिरमौर है,बेटी भाग्य है, विधाता … Read more