मुख पर पहरा था
सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* फूलों के चेहरे उतरे थेपत्तों के गुमसुम तेवर थे,कंपित से खड़े चिनार थेखफ़ा मानव से देवदार थे,मौसम में स्याह वीरानी थीक्या चाल कोई चली जानी थी ?? अनहोनी का गंदा खेल रचाआतंक मन में हर्षाया था,ये किसने खेल बिछाया थाजिसे जान समय थर्राया था,धुआँ आलम कहता-सा लगापर उसके मुख पर पहरा … Read more