किसान है जान
सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*********************************************** आराम नहीं जानता, है विरुद्ध वह जान।मेहनत करता प्यार से, पाए उसमें शान॥ श्रम करता भरपूर ही, करे नहीं वह आह।मिलता हरदम नूर ही, करे काम की चाह॥ महल बनाये गैर के, रहे झोपड़ी नित्य।बोलो कैसे सुखी रहे, करता है निज कृत्य॥ चिंता उसको पेट की, पूरी कभी न होय।पेट … Read more