माँ चंद्रघंटा-३
सपना सी.पी. साहू ‘स्वप्निल’इंदौर (मध्यप्रदेश )******************************************** ललाट सुशोभित अर्ध शशि,दश भुजाएं है आयुध धारीतृतीय माँ चंद्रघंटा रणचंडी,आद्यशक्ति, जगकृपाकारी। घंटा नाद गुंजित हो जब-जब,थर-थर कांपे दानव दुराचारीभयहरण करती माँ तब-तब,देती अभयदान माँ उपकारी। तेजोमय मुखड़ा सूर्य से प्रखर,आलौकिक, भव्य, बलधारी।साधकों की सब बाधा हरती,शीतल रम्यता कल्याणकारी। सिंह वाहिनी ज्यों प्रचंड वेगिनी,त्रिलोक के पापी थर-थर थर्राएंमाँ सृजनी, … Read more