रेशम की डोर
डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* वो यादें रक्षा-बंधन की, सुन्दर अतीत मुस्काता है,मधुर सहोदर ममता बहना, गुमसुम ढांढस अब देता हैइंतज़ार नित बंद लिफाफा, थी राखी प्रेषित सौगातें,रेशम की डोरों का बंधन, विश्वास सहोदर भाता है। ममता समता अपनापन रस, रक्षा मिठास भर जाता है,रिश्तों की स्नेहिल सरिताओं, विमल जल प्रवाहित होता हैमधुरिम बचपन … Read more