चीं चीं

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** चीं चीं चीं चीं करती चिड़ियारोज़ वहीं पर आती चिड़िया,जहाँ बैठती मैं नित जाकरआस-पास मँडराती चिड़िया। समय से पहले वो आ जातीजैसे लेती नित्य परीक्षा,पानी लेकर एक कटोरामैं भी करती उसकी प्रतीक्षा। एक दिन बोली मैं चिड़िया से-ओ मेरी नन्ही-मुन्नी चिड़िया,पंख तुम्हारे बड़े काम केजब चाहे उड़ जाओ बढ़िया। वह बोली-यह बल … Read more

हमारा देश बदल रहा है

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** अभी तो रुको जरा पिक्चर अभी बाकी है,ए भाई, ए भाई, ए भाई…कोई धमाका नहीं… ना कोई लाठीचार्ज…ना टी.वी. पर ब्रेकिंग न्यूज…बस एक नाम… एक कागज़… और एक दस्तक। जहाँ लड़ाई बंदूक से नहीं, दस्तावेज़ से लड़ी जा रही हैजहाँ दुश्मन कोई सेना नहीं… बल्कि फर्जी वोटर हैं… घुसपैठिए हैं… फर्जी … Read more

बनो सीप के मोती

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* बनो सीप के मोती, कर्मवीर गुणवान।मददगार आपद समय, इन्सानी भगवान॥ रखो स्वयं पर आस्था, बढ़ो धेय संकल्प।धीरवान बन सीप सम, उद्यम नहीं विकल्प॥ करो प्रतीक्षा समय की, नियति सत्य ध्यातव्य।अविरत पौरुष प्रगति पथ, रचो कीर्ति अस्तित्व॥ एक बूँद हो स्वाति जल, मोती बनते सीप।कठिनाई बाधा सहे, बनता देश महीप॥ … Read more

करो विदाई झूठ की

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* करो विदाई झूठ की, तो महके संसार।करना केवल सत्य से, बंदे तू नित प्यार॥ करो विदाई द्वेष की, वरना हो अवसान।जिनका पावन मन रहे, वे पाते उत्थान॥ करो विदाई क्रोध की, बनें बिगड़ते काम।जीवन होगा मांगलिक, विहँसें नव आयाम॥ करो विदाई जो बुरा, मद्यपान दो छोड़।दुर्व्यसनों की राह को, बंदे तू … Read more

जन-दर्द की थे आवाज़

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)****************************************** मुंशी प्रेमचंद जयंती विशेष… कलम के सिपाही, किया शब्दों से राज,जन-जन के दर्द की जो थे आवाज़। ‘गोदान’ की पीड़ा, ‘गबन’ की टीस,हर पंक्ति में बताई जीवन की रीत। ‘कफन’ में लिपटी समाज की सच्चाई,‘नमक का दरोगा’ ने ईमानदारी जगाई। ‘ईदगाह’ के हामिद में साहस था गहरा,लोहे के चिमटे से वो … Read more

पावस की अमृत बूँद

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* कभी-कभी इन उलझनों,से दूर होने को जी करता हैइस बंजर ज़िंदगी में,हरी-भरी चुनर ओढ़े धरती सेखुशियों की फुहार जब बरसती है। रिमझिम फुहारों की दस्तक मिलते ही,मन हरा-भरा खिलने लगता हैबदरा जब गगन में अठखेलियाँ करे,पावस के गीत होठों पर मधुर सजेपायल की रुन-झुन खनक सुनाई पड़े। हरी-हरी कंगन हाथों में … Read more

जीवों से रखें अनुराग

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* नागपंचमी पर्व का, सुंदर बहुत विधान।संस्कारों की देह में, नैतिकता के प्रान॥ नाग पूजकर पुण्य ले, खुश होते हैं ईश।मिले प्रकृति का साथ नित, मिलता है आशीष॥ नाग जीव सादा-सरल, जीने का अधिकार।जब तक छेड़ो मत उसे, देता नहिं फुंफकार॥ दूध पिला पूजन करो, वंदित हो अब नाग।सब जीवों से हम … Read more

न दे पाए कोई आकार

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’जमशेदपुर (झारखण्ड)******************************************* एक चित्रकार हाेते हुए भी,तुम न दे पाए-चित्र काे काेई आकार। तूलिका से रंग भरते-भरते,बिखर गया है तेरा सारा रंग-फिर भी तुम रंग भरते जाते हाे। शायद,इनसे बने जाे रुप-उसकी है तुम्हें तलाश। चित्र एक जीवन है,इसमें भी है उमंगाें का-उतार-चढ़ाव। कुछ बनना-कुछ बिखरना,मुस्कराहट संग पीड़ा का सैलाब-इसमें भी प्रणय … Read more

माँ के लाड़ले

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* शिक्षा पाने घर से बहुत दूर रहते हैं,माँ के लाड़ले कितने प्रेशर में जीते हैं‘मम्मी-मम्मी’ कह पीछे घूमने वाले,कई बार खाली पेट दिन गुज़ार देते हैं। कपड़े, उठाना, धरना सीखते हैं,सारी व्यवस्था खुद ही देखते हैंकभी धोबी से, कभी बाई से उलझ,धीरे-धीरे गृहस्थी सजाना सीखते हैं। पढ़ाई के बाद जॉब के … Read more

भज मन रघुवर

सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*********************************************** भज मन रघुवर, भज मन सिय वर,भज त्रिभुवन पति, बुजदिल मनवा। कण-कण हरि-हरि, बिन सदगुरु पथ,सुमिरन पल हरि, रट-रट रसना। तिमिर गहन प्रभु, विनय सहित प्रभु,अनुनय कर हम, हरि शरण पड़े। अनगिनत विचित्र, हिय बिन सुमिरन,मनुज बिन भजन, पल-पल फिसले। सरवर बिन जल, रघुवर बिन मन,असहज सहृदय, अवसर सुध लें। … Read more